
Bharat Varta Desk : सनातन धर्म के पर्व-त्योहारों में होली का खास स्थान है। आम तौर पर इसके एक दिन पूर्व होलिका दहन या छोटी होली मनाई जाती है। लेकिन, इस बार होलिका दहन की तिथि को लेकर आम लोगों में ही नहीं, बल्कि पंडितों में भी मतभेद नज़र आ रहे हैं। कोई होलिका दहन के लिए 6 मार्च की शाम का समय अच्छा बता रहा है तो कोई 7 मार्च को सूर्योदय से पहले दहन करना ठीक बता रहा है। यह स्थिति भद्रा के कारण उत्पन्न हुई है, जिसमें कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित रहता है। वहीं, होलिका दहन भी सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय के पहले ही करने का नियम है। ऐसे में अलग-अलग पंडित, होलिका दहन का अलग-अलग समय बता रहे हैं।
पटना ग्रामीण क्षेत्र पालीगंज के पंडित अचला नन्द तिवारी ने कहा कि 6 मार्च को फाल्गुन शुक्ल पक्ष चतुर्दशी दोपहर बाद 3:56 बजे तक है। इसके बाद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हो रही है। जो 7 मार्च के शाम 5:40 बजे तक रहेगा। 7 मार्च को सूर्यास्त से पहले ही पूर्णिमा समाप्त हो रहा है। भद्रा भी पूर्णिमा के साथ ही प्रारंभ होकर दोपहर बाद 3:56 बजे से शेष रात्रि 4:48 बजे तक (7 मार्च की सुबह) भोग कर रही है। भद्रा में श्रावणी और फाल्गुनी (होलिका दहन) वर्जित है। कहा भी गया है-
“भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा,
श्राणवी नृपतिं हन्ति ग्रामं दहति फाल्गुनी।”
इसका अर्थ है कि श्रावणी के दिन भद्रा में राजा एवं फाल्गुनी के दिन भद्रा में होलिका दहन से ग्राम और देश का नाश होता है। अत: इस निर्णय के अनुसार, होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 6 मार्च, सोमवार की देर रात्रि भद्रा के पश्चात 4:48 बजे (7 मार्च की सुबह) के बाद और सूर्योदय 6:11 बजे से पूर्व करना सही रहेगा।
8 मार्च को प्रतिपदा में होली मनाया जाएगा।
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