
पटना : अपराध अनुसंधान को वैज्ञानिक और तेज़ बनाने की दिशा में बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को बिहार पुलिस के लिए 34 अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन का लोकार्पण किया। इन वैनों की मदद से अब अपराध स्थल पर ही साक्ष्य का त्वरित और तकनीकी संग्रह संभव हो सकेगा।
लोकार्पण समारोह में उपमुख्यमंत्री (गृह) सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, मंत्री विजय कुमार चौधरी, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविन्द कुमार चौधरी, बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार और अपराध अनुसंधान विभाग के अपर पुलिस महानिदेशक पारसनाथ सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के तहत सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले गंभीर मामलों में फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भूमिका अनिवार्य कर दी गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य की फॉरेंसिक व्यवस्था को सशक्त किया जा रहा है।
इन मोबाइल फॉरेंसिक वैनों में डीएनए सैंपल कलेक्शन किट, फिंगरप्रिंट व फुटप्रिंट लिफ्टिंग सिस्टम, साइबर फॉरेंसिक टूल, दस्तावेज़ परीक्षण उपकरण, रक्त व जैविक साक्ष्य संग्रह किट, विस्फोट जांच किट, ड्रग डिटेक्शन किट तथा उच्च गुणवत्ता वाले कैमरा और वीडियो डॉक्यूमेंटेशन सिस्टम उपलब्ध हैं।
अधिकारियों के अनुसार, इन वैनों से घटनास्थल पर ही साक्ष्य संरक्षण, चेन ऑफ कस्टडी का पालन और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका कम होगी, जिससे अपराधियों को सजा दिलाने में मदद मिलेगी।
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