
Bharat Varta desk- सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पैसे की भूख ने भ्रष्टाचार को कैंसर की तरह पनपने में मदद की है। उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों में भ्रष्टाचार को 7 पापों में से एक बताया गया है। इस पर कड़ाई से नियंत्रण की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्टके न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री रमन सिंह सरकार में प्रधान सचिव रहे अमन कुमार सिंह और उनकी पत्नी के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति के मामले में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने के उच्च अदालत के फैसले को रद्द करते हुए उक्त टिप्पणी की।
अदालत ने कहा कि संविधान के तहत स्थापित अदालतों का देश के लोगों के प्रति कर्तव्य है कि वे दिखाएं कि भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। साथ ही वे अपराध करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी करें।
अदालत ने यह भी कहा कि संविधान की प्रस्तावना में भारत के नागरिकों से सामाजिक न्याय का जो वादा किया गया है, उसे संपत्ति के वितरण के जरिए ही पूरा किया जा सकता है। उच्चतम न्यायालय ने भ्रष्टाचार को प्रस्तावना में किए गए इस वादे को पूरा करने की राह का बड़ा रोड़ा बताया।
भारतीय राजस्व सेवा के पूर्व अधिकारी और काली कमाई के आरोपी सिंह छत्तीसगढ़ की रमन सिंह सरकार में काफी रसूख वाले नौकरशाह थे और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के रूप में काम कर रहे थे। यह मुख्यमंत्री के काफी नजदीक बताए जाते थे। बाद में, नवंबर 2022 में वह कॉरपोरेट कस्टोडियन एंड कॉरपोरेट अफेयर्स प्रमुख के रूप में अडाणी समूह से जुड़े। बाद में जब अडाणी समूह ने समाचार चैनल एनडीटीवी को खरीदा तो सिंह चैनल के बोर्ड के सदस्य के रूप में नियुक्त किए गए। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ ही सिंह और उनकी पत्नी यास्मीन सिंह के खिलाफ मुकदमा चलने का रास्ता साफ हो गया है।
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