शख्सियत

समर्पण की मिसाल: पूर्व IPS राज्यवर्धन शर्मा की पत्नी का निधन, 15 सालों से लकवाग्रस्त पत्नी की कर रहे थे सेवा

डॉ ऋषिकेश

पटना : आप लोगों ने फिल्मों और किताबों में सच्चे प्यार की बहुत सी कहानियां देखी और पढ़ी होंगी। ऐसा बताया जाता है कि असल जिंदगी में सच्चा प्रेम बहुत ही कम किस्मत वालों को मिलता है। प्रेम का रिश्ता आपसी समझ और प्यार का होता है। अगर हम पति-पत्नी के रिश्ते की बात करें तो यह रिश्ता बहुत ही पवित्र माना गया है। अपने रिश्ते से पति-पत्नी दुनिया की हर मुश्किल परिस्थिति को पार कर सकते हैं। पति-पत्नी का एक-दूसरे के ऊपर अटूट विश्वास ही प्रेम होता है। शादीशुदा जिंदगी विश्वास पर ही रहती है। ऐसा बताया जाता है कि मुसीबत में पति-पत्नी का एक दूसरे का साथ इस बात को दर्शाता है कि वह कितना प्रेम करते हैं। रिश्तों को निभाने और जज्बात को समझने की बातें सिर्फ फिल्मों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि असल जिंदगी के रियल लाइफ हीरोज भी ऐसे काम करते हुए मिसाल पेश करते रहते हैं। पत्नी के प्रति पति का क्या फर्ज होता है, बिहार के एक सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी ने इसकी मिसाल पेश की है। पटना जिले के पालीगंज के प्रखंड के छोटे से दहिया गांव से निकलकर आईपीएस बने राज्यवर्धन शर्मा ने समर्पण की मिशाल पेश की है। वे बीते 15 सालों से अपनी लकवाग्रस्त पत्नी की सेवा करते रहे। आखिरकार बुधवार की सुबह सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी राज्यवर्धन शर्मा की पत्नी जयश्री शर्मा जिंदगी की जंग हार गईं।

राज्यवर्धन शर्मा 1980 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी रहे हैं। पटना के जोनल आईजी के पद पर पदस्थापन के दौरान ही वर्ष 2007 में राज्यवर्धन शर्मा की पत्नी को पैरालिसिस अटैक हुआ था, जिसके कुछ दिन बाद ही वह कोमा में चली गईं थी। उस वक्त राज्यवर्धन शर्मा के एकमात्र पुत्र व पुत्री अमेरिका में पढ़ाई कर रहे थे। बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो सके, इस कारण राज्यवर्धन शर्मा तब बच्चों को इसकी कोई जानकारी दिए बिना पत्नी की सेवा में स्वयं लगे रहे। पटना के जोनल आईजी सहित कई प्रमुख पदों पर रहने और विभागीय कार्यों के बोझ के वावजूद पत्नी की सेवा राज्यवर्धन शर्मा की दिनचर्या बनी रहीं। वे पत्नी की सेवा और अपनी विभागीय जिम्मेदारी एकसाथ निभाते रही। उनकी क्षवि सख़्त व आमजन से जुड़ाव रखने वाले पुलिस अधिकारी की रही है। पटना के आईजी रहते वे अपने कार्यालय में हर दिन फरियादियों से मिलते दिखते थे। कार्यालय में उनके चेहरे पर कभी बीमार पत्नी के कारण उत्पन्न तनाव व दर्द नहीं दिखता था। हर दिन अनेकों फरियादियों के समस्याओं का समाधान करने वाले अधिकारी अपने खुद के दर्द को हमेशा छिपाते दिखते थे। सेवानिवृति के बाद तो उन्होंने स्वयं को पूरी तरह पत्नी के देखभाल और सेवा में ही समर्पित कर दिया। तब से अब तक उनकी बिस्तर पर ही रहीं वे इस विश्वास के साथ पत्नी की सेवा में जुटे रहे कि आज न कल वो ठीक हो जाएंगी। एक बार बातचीत के दौरान उन्होंने हमसे बताया कि मैंने पत्नी से यही कहा है- तुम चिंता मत करो, मैं जीवनभर तुम्हारी देखभाल करूंगा।

अब राज्यवर्धन शर्मा की पत्नी जिंदगी की जंग हार गईं हैं। निधन की खबर से राज्यवर्धन शर्मा के शुभचिंतकों के बीच शोक की लहर है l उनके गांव पालीगंज के दहिया में भी शोक की लहर व्याप्त है। राज्यवर्धन शर्मा का अपने गांव से जुड़ाव सदैव बना रहा है। सच मायने में देखा जाए तो राज्यवर्धन शर्मा ने प्रेम की मिसाल पेश की है। हम राज्यवर्धन शर्मा जैसे समर्पित व्यक्ति को सलाम करते हैं।

Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

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