
पटना। बिहार की साहित्यिक विरासत, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक अस्मिता को समर्पित लेट्स इंस्पायर बिहार (LIB) द्वारा आयोजित प्रथम साहित्य महोत्सव 2026 का आयोजन शनिवार को पटना स्थित विद्यापति भवन में किया गया। द लिटरेरी मिरर के सहयोग से आयोजित इस एकदिवसीय महोत्सव में बिहार और देश के अनेक प्रतिष्ठित लेखक, कवि, प्रशासक, शिक्षाविद, चिंतक और युवा साहित्यकार शामिल हुए।
कार्यक्रम में साहित्य को सामाजिक परिवर्तन, प्रतिरोध, पहचान और सांस्कृतिक निरंतरता के एक प्रभावी माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया गया। पैनल चर्चाएं, काव्य पाठ, पुस्तक विमोचन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और संवाद सत्र इस महोत्सव के प्रमुख आकर्षण रहे।
कार्यक्रम में मौजूद रहे कई प्रतिष्ठित अतिथि
महोत्सव के मुख्य अतिथि बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा मंत्री अरुण शंकर प्रसाद रहे। कार्यक्रम में लेट्स इंस्पायर बिहार के मुख्य संरक्षक विकास वैभव, आईपीएस, राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो, बिहार के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एवं प्रख्यात लेखक अमित लोढ़ा, आईपीएस, लेखक एवं राजनेता मृत्युंजय शर्मा, राज्य कर विभाग के उप आयुक्त एवं कवि समीर परिमल, छपरा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. परमेंद्र वाजपेयी, हंस पत्रिका की प्रबंध निदेशक रचना यादव, विंग कमांडर (सेवानिवृत्त) उमेंद्र कुमार त्रिपाठी, स्तंभकार एवं वक्ता, LIB साहित्यिक अध्याय की मुख्य समन्वयक ज्योति झा, प्रियंका झा, पल्लवी रानी, कवयित्री एवं लेखिका राधा शैलेंद्र तथा कवि, लेखक और मंच कलाकार अविनाश बंधु सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, पत्रकार और सांस्कृतिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
उद्घाटन सत्र में बोले विकास वैभव, आईपीएस
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विकास वैभव, आईपीएस ने बिहार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, युवा शक्ति और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से विचार रखा। उन्होंने कहा कि बिहार को सतत विकास के लिए लगभग 15 प्रतिशत की विकास दर की आवश्यकता है, जो सामूहिक प्रयास और सामाजिक समरसता से प्राप्त की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि बिहार की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है और यदि युवाओं की रचनात्मक और उद्यमशील क्षमता को सही दिशा दी जाए, तो राज्य राष्ट्रीय विकास में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
सभ्यतागत विरासत और साहित्य की भूमिका
विकास वैभव ने भगवान बुद्ध की भूमि बिहार, नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालयों की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार ने सदियों तक वैश्विक बौद्धिक जगत को दिशा दी है। उन्होंने विद्यापति, रामधारी सिंह ‘दिनकर’, फणीश्वरनाथ ‘रेणु’, नागार्जुन, शिवपूजन सहाय और राहुल सांकृत्यायन जैसे महान साहित्यकारों का स्मरण करते हुए कहा कि उनकी रचनाएं आज भी समाज को सोचने की दिशा देती हैं।
मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने साहित्य को बताया समाज का दर्पण
मुख्य अतिथि अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि इस तरह के साहित्यिक आयोजन बिहार की सांस्कृतिक आत्मा को मजबूत करते हैं। उन्होंने लेट्स इंस्पायर बिहार को एक मूल्य आधारित सामाजिक आंदोलन बताते हुए कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है और सामाजिक सुधार में इसकी भूमिका निर्णायक है।
उन्होंने अपने मंत्रालय की गुरु–शिष्य परंपरा योजना का भी उल्लेख किया और LIB से आग्रह किया कि वह इस योजना की जानकारी युवाओं तक पहुंचाए।
‘सामाजिक परिवर्तन के उपकरण के रूप में साहित्य’ सत्र रहा आकर्षण
महोत्सव का प्रमुख सत्र “सामाजिक परिवर्तन के उपकरण के रूप में साहित्य: बिहारी परिप्रेक्ष्य” रहा, जिसमें अमित लोढ़ा, आईपीएस और मृत्युंजय शर्मा के बीच संवाद हुआ। इस संवाद में प्रशासनिक अनुभव, लेखन और मानवीय संवेदनशीलता के संबंध पर गहन चर्चा की गई।
अमित लोढ़ा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि साहित्य किस प्रकार संस्थाओं और समाज को अधिक मानवीय बनाता है।
कविता, मंच और रचनात्मक प्रस्तुति
अंतिम पैनल “लेखकों की दृष्टि में बिहार: कविता और मंच प्रस्तुति” रहा, जिसमें राधा शैलेंद्र, अविनाश बंधु सहित अन्य कवि और कलाकार शामिल हुए। कविता और मंच प्रस्तुति के माध्यम से बिहार की सामाजिक वास्तविकताओं और भावनात्मक पक्ष को सामने रखा गया।
पुस्तक विमोचन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
कार्यक्रम के दौरान कई पुस्तकों का विमोचन हुआ। काव्य संध्या और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में विभिन्न पृष्ठभूमियों से आए कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं, जिससे कार्यक्रम का वातावरण साहित्यिक ऊर्जा से भर गया।
आयोजन और समन्वय
कार्यक्रम के आयोजन और संचालन में LIB टीम की अहम भूमिका रही। सोशल मीडिया समन्वयक आशीष रंजन, रोहित राज, विकास कुमार, आमिर अहमद, नूतन पांडेय, डॉ. प्रीति बाला, ओ. पी. सिंह, मोहन कुमार झा, अनिल कुमार झा, नम्रता कुमारी सहित LIB के अन्य सदस्यों ने व्यवस्थाओं को संभाला।
मंच संचालन अनूप नारायण सिंह और श्वेता सुरभि ने किया, जबकि विभिन्न सत्रों में पल्लवी रानी, अर्चना त्रिपाठी, ज्योति झा, अनिल झा, आरजे सुरभि और रत्ना पुर्कायस्थ ने मंच संचालन किया।
साहित्यिक आंदोलन की दिशा
कार्यक्रम के समापन पर LIB के राष्ट्रीय प्रवक्ता रोहित कुमार ने कहा कि यह महोत्सव बिहार के सांस्कृतिक और बौद्धिक पुनर्जागरण की दिशा में एक मजबूत कदम है। वहीं साहित्यिक अध्याय की समन्वयक ज्योति झा ने कहा कि यह महोत्सव बिहार में एक स्थायी साहित्यिक आंदोलन का रूप लेगा।
लेट्स इंस्पायर बिहार प्रथम साहित्य महोत्सव 2026 साहित्य की परिवर्तनकारी शक्ति और बिहार के बौद्धिक योगदान की पुनः पुष्टि के साथ संपन्न हुआ।
Bharat varta Desk थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में सोमवार (13 जुलाई) की सुबह भीषण हादसा… Read More
Bharat varta Desk वियतनाम के फू क्वोक द्वीप के पास शनिवार को भारतीय पर्यटकों को… Read More
Bharat varta Desk बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी अमित कुमार अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की… Read More
Bharat varta Desk अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी के मामले… Read More
Bharat varta Desk डॉ. महेश दीक्षित को भारत की प्रमुख खुफिया एजेंसी, खुफिया ब्यूरो (IB)… Read More
Bharat varta Desk भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उत्तर प्रदेश में अपनी नई टीम का… Read More