Categories: Uncategorised

पीएम केयर्स फ़ॉर चिल्ड्रेन योजना क्या है? इससे अनाथ बच्चों को कितना लाभ मिल पायेगा?

Bharat Varta Desk : भारत में वैश्विक महामारी कोरोना के प्रकोप से अनाथ हुए बच्चों को केंद्रीय और राज्य प्रशासन से जो मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक सहयोग के साथ-साथ अपने पैरों पर खड़े होने तक की अवधि के लिए जो आर्थिक मदद मिली है, उससे सबको एक बात का एहसास हो चुका है कि हिंदुस्तान एक कल्याणकारी राज्य यानी वेलफेयर स्टेट है और उसके नागरिकों पर यदि किसी भी तरह की प्राकृतिक या मानव जनित आपदा आती है तो प्रशासनिक मिशनरी अपने नागरिकों की मदद के लिए तुरंत ततपर हो जाती है और कानून के दायरे में रहकर यथासम्भव मदद भी करती है। यदि कोई विधान इस दिशा में आड़े आता है तो उसे बदला जाता है और यदि किसी नये विधान की जरूरत महसूस होती है तो उसे सर्वसम्मति से बनाया भी जाता है। कोरोना काल इसका सबसे बड़ा नजीर है।

कोरोना महामारी से अनाथ हुए बच्चों के परवरिश के लिए देवदूत बनकर सामने आए पीएम मोदी-सीएम योगी

देखा जाए तो 21 वीं सदी की सबसे भयावह वैश्विक महामारी कोविड 19 यानी कोरोना से उपजी हताशा व निराशाजनक परिस्थितियों में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत तमाम संवेदनशील राजनेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ साथ स्वनामधन्य समाजसेवियों ने जनमानस का जो उत्साहबर्द्धन किया और हरेक जरूरी चीजें राज्य प्रशासन की कीमत पर मुहैय्या करवाई, वैसा उदाहरण विरले ही मिलता है। उस दौर में भी पीएम/सीएम केयर्स फंड ने अपनी प्रासंगिकता साबित की थी, और आज जब कोरोना महामारी में अपने माँ-बाप को गंवा कर अनाथ हो चुके बच्चों के जीवन-यापन और पढ़ाई-लिखाई का सवाल  सबके सामने समुपस्थित हुआ है, तब भी केंद्र और राज्य सरकारों ने अपने अपने स्तर से सराहनीय पहल की है, कर रही है जो आज भी जारी है। 

 पीएम केयर्स फ़ॉर चिल्ड्रेन योजना: जब 23 साल के होंगे बच्चे, तब उन्हें एकमुश्त दिए जाएंगे दस लाख रूपये 

इसकी कड़ी में सबसे महत्वपूर्ण कार्य “पीएम केयर्स फ़ॉर चिल्ड्रेन योजना” से जुड़े फंड ने किया है, जिसके तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रभावित अनाथ बच्चों के लिए गत दिनों न केवल पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति जारी की, बल्कि स्वास्थ्य कार्ड समेत अन्य अत्यावश्यक मदद किये जाने के योजनागत संकेत भी दिए। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, कोरोना महामारी में अपने माता-पिता या स्वाभाविक अभिभावक को खो चुके बच्चों को मनोवैज्ञानिक एवं भावनात्मक मदद के लिए आयुष्मान कार्ड के माध्यम से ‘स्वास्थ्य बीमा’ और ‘संवाद हेल्पलाइन’ के माध्यम से परामर्श दिया जाएगा। वहीं, 18 साल से 23 साल तक के युवाओं को हर महीने मानदेय देने की भी व्यवस्था की गई है। साथ ही, ऐसे प्रभावित बच्चे जब यह 23 साल के होंगे तब दस लाख रूपये (₹10,000,00) उन्हें एक साथ दिए जाएंगे।

करीब 4000 बच्चों को चालू वित्त वर्ष में पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन के तहत मिला है छात्रवृत्ति का लाभ 

इस प्रकार पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन योजना फंड यह दर्शाता है कि देश का हर नागरिक संवेदनशीलता के साथ इन बच्चों के साथ खड़ा है। जिसकी वजह से कोरोना महामारी से अनाथ हुए करीब 4000 बच्चों को चालू वित्त वर्ष में अब तक पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन के तहत छात्रवृत्ति का लाभ मिला है। 

कुल 9057 आवेदन मिले, 4345 आवेदन हुए मंजूर

बता दें कि कोरोना वायरस के प्रकोप से अपने-अपने माँ-बाप या स्वाभाविक अभिभावक को खो चुके बच्चों के लिए पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना ने यह नई पहल की है। जिसके तहत मदद के लिए देश के 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 611 जिलों से कुल 9057 आवेदन आए हैं। इनमें से 557 जिलों के 4345 आवेदनों को मंजूर कर दिया गया है। 

कोरोना प्रकोप से अनाथ हुए बच्चों के रजिस्ट्रेशन के लिए pmcaresforchildren.in नाम से लांच किया गया था पोर्टल

बताया गया है कि 11 मार्च 2020 से 28 फरवरी 2022 की अवधि के दौरान अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों को इस योजना का लाभ मिलेगा। इस स्कीम का उद्देश्य ऐसे बच्चों के रहने की व्यवस्था की जाएगी और शिक्षा व स्कॉलरशिप के जरिए उनकी मदद करके उन्हें सशक्त बनाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि गत 29 मई 2021 को यह योजना लांच की गई थी। पहले इस स्कीम के तहत लाभ लेने की डेडलाइन 31 दिसंबर 2021 थी, बाद में इसे 28 फरवरी तक बढ़ाया गया। इसके तहत 23 साल की उम्र में दस लाख रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी। साथ ही उन्हें पांच लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस मिलेगा। ऐसे बच्चों के रजिस्ट्रेशन के लिए pmcaresforchildren.in (पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन डॉट इन) नाम से पोर्टल लांच किया गया था। जिला बाल संरक्षण इकाई और नागरिक समाज के सदस्यों की सहायता से उपायुक्तों द्वारा ऐसे बच्चों की पहचान की गई है।

कोरोना के कारण अनाथ हुए बच्चों को पीएम केयर्स फंड से मिलेगी नि:शुल्क शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाएं

कोरोना के कारण अनाथ हुए बच्चों को केंद्र सरकार की तरफ से नि:शुल्क शिक्षा प्रदान की जाएगी। 10 साल से छोटे बच्चों का नजदीकी सेंट्रल स्कूल या प्राइवेट स्कूल में दाखिला दिलवाया जा रहा है। 11 से 18 वर्ष के बीच के बच्चों को सैनिक स्कूल और नवोदय विद्यालय जैसे केंद्र सरकार के किसी भी आवासीय स्कूल में शिक्षा देने की योजना है। बच्चे की फीस, स्कूल यूनिफार्म, किताब और कॉपी खर्च का भुगतान पीएम केयर्स फंड से होगा। ऐसे बच्चों को सरकार 18 साल की उम्र तक हर महीने भत्ता देगी। आयुष्मान भारत योजना के तहत 18 साल तक पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा मिलेगा। 

राजस्थान से सर्वाधिक 1547 आवेदन मिले, जबकि उत्तराखंड से सबसे कम 84 आवेदन मिले

सरकार ने इस योजना की शुरुआत पिछले वर्ष 29 मई 2021 को की थी, जिसका मकसद ऐसे बच्चों की मदद करना है जिन्होंने कोरोना वायरस के चलते 11 मार्च 2020 28 फरवरी 2022 के बीच अपने माता-पिता या कानूनी अभिभावक या दत्तक माता-पिता को खो दिया हो। बता दें कि राजस्थान (1547), महाराष्ट्र (1434), उत्तरप्रदेश (977), मध्य प्रदेश (829), तमिलनाडु (612), आंध्र प्रदेश (518) से सबसे ज्यादा आवेदन आए हैं, जबकि बिहार (183), हरियाणा (161), छत्तीसगढ़ (149), झारखंड (123) और उत्तराखंड (84) से अपेक्षाकृत कम आवेदन आए हैं।

आपके माता-पिता के न होने पर मां भारती आपके साथ है: नरेंद्र मोदी, पीएम

पीएम मोदी ने ऐसे बच्चों को सम्बोधित करते हुए ठीक ही कहा है कि “कोरोना महामारी की मार पूरी दुनिया ने सही है। आपने जिस साहस और हौसले से इस संकट का सामना किया है। उस हौसले के लिए मैं आपको सलाम करता हूं। पूरा देश आपके साथ है। मैं एक बात और कहूंगा कि कोई भी प्रयास और सहयोग आपके माता-पिता के स्नेह की भरपाई नहीं कर सकता, लेकिन उनके न होने पर मां भारती आपके साथ है।”

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर न केवल भारत की ताकत बढ़ी है बल्कि विश्व में बढ़ा है देश का गौरव भी 

स्पष्ट है कि भारत ने पिछले 8 वर्षों यानी मोदी वन और टू सरकार के जारी कार्यकाल में जो मुकाम हासिल किया है, उसकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। क्योंकि इस अवधि में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर न केवल भारत की ताकत बढ़ी है जिससे विश्व में देश का गौरव भी बढ़ा है, बल्कि प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ाकर सरकार ने गरीबों के अधिकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की है। 

कोरोना काल में भारत शेष दुनिया के लिए भी आशा की एक किरण बनकर उभरा

इस बात में कोई दो राय नहीं कि भारत ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए अपनी क्षमताओं, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों और युवाओं पर भरोसा दिखाया। जिसके चलते उस मुश्किल हालात में भी भारत शेष दुनिया के लिए आशा की एक किरण बनकर उभरा। पीएम मोदी के नेतृत्व में प्रशासन ने देश में सफल टीकाकरण अभियान चलाने के साथ साथ दुनिया के कई देशों कोरोनारोधी टीके दिए और अन्य दवाइयां भी मुहैया कराई। कोरोना से निपटने के लिए देश में अब तक करीब 200 करोड़ खुराक दी जा चुकी हैं।

Dr Rishikesh

Editor - Bharat Varta (National Monthly Magazine & Web Media Network)

Share
Published by
Dr Rishikesh

Recent Posts

Ex Deputy CM और DMK नेता उदयनिधि स्टालिन गिरफ्तार

Bharat varta Desk -मुख्यमंत्री विजय और अभिनेत्री तृषा पर टिप्पणी का आरोप -उनकी रैली में… Read More

7 days ago

प्रहलाद जोशी देश के नए शिक्षा मंत्री

Bharat varta Desk धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी फिलहाल प्रह्लाद… Read More

2 weeks ago

सीजेपी ने छात्र आंदोलन खत्म करने का किया ऐलान

Bharat varta Desk दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय से चल रहा… Read More

2 weeks ago

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

Bharat varta Desk जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र… Read More

2 weeks ago

NTA के 47 कर्मचारी बर्खास्त

Bharat varta Desk NEET पेपर लीक मामले में छात्रों के प्रदर्शन के बीच एनटीए ने… Read More

2 weeks ago

केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी को हटाया, एनटीए प्रमुख प्रदीप जोशी कब हटेंगे?

Bharat Varta Desk दिल्ली में चल रहे NEET पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन… Read More

3 weeks ago