ऑस्ट्रेलिया में बजा विश्व हिन्दी परिषद का डंका, ब्रिस्बेन में अंतर्राष्ट्रीय साहित्य चौपाल का आयोजन, हिंदी उत्सव में दुनिया भर के हिंदी लेखकों की जुटान

Bharat varta Desk


विश्व हिन्दी परिषद की ऑस्ट्रेलिया चैप्टर की अध्यक्ष मधु खन्ना के नेतृत्व में हिंदी भाषा और साहित्य को समर्पित प्रथम अंतर्राष्ट्रीय साहित्य चौपाल का भव्य आयोजन ब्रिस्बेन में किया गया। आयोजन का नेतृत्व मधु खन्ना ने किया जबकि मार्गदर्शन परिषद के संस्थापक राष्ट्रीय महासचिव डॉ विपिन कुमार ने किया।
इस मौके पर भारत सहित विश्व के अनेक देशों से हिन्दी साहित्यकारों और विद्वानों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा “अस्तित्व: संघर्ष में जीत” पुस्तक का विमोचन, जिसे ब्रिस्बेन में भारत के कार्यवाहक कौंसुल जनरल सुशील कुमार गोयल द्वारा औपचारिक रूप से जारी किया गया।
इसमें ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न प्रांतों के साथ-साथ न्यूज़ीलैंड, जर्मनी, इंग्लैंड, अमेरिका, जापान और भारत से हिन्दी विद्वानों को आमंत्रित किया गया। अनेक प्रतिभागी आभासी माध्यम से सिडनी, पर्थ और मेलबर्न से जुड़े, जबकि ब्रिस्बेन और आसपास के क्षेत्रों से २२ कवि और साहित्यकार स्वयं उपस्थित हुए।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से जिन साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, उनमें अर्चना गोयल (ऑस्ट्रेलिया), हर्षिता सोम (क्वींसलैंड विश्वविद्यालय), पूजा भारद्वाज (पर्थ), डॉ. भावना कुँवर (सिडनी), डॉ. सपना कपूर (जर्मनी), डॉ. शलभ कुमार (जापान), डॉ. किशोर मिश्रा (ब्रिस्बेन), कादम्बरी आदेश (फ्लोरिडा, अमेरिका), डॉ. रंजीत शर्मा (स्लफ, इंग्लैंड), सौम्या प्रधान (ब्रिस्बेन), डॉ. मृदुल कीर्ति (जॉर्जिया, अमेरिका), राशि सक्सेना (ऑस्ट्रेलिया), पंकज अग्रवाल (समाज ऑस्ट्रेलिया), डॉ. संगीता बनाफर (लखनऊ), दुर्वा तिवारी (ब्रिस्बेन), डॉ. मेनका त्रिपाठी (हरिद्वार), डॉ. बृज राज पांडे (ऐस्प्ली, ऑस्ट्रेलिया), डॉ. वेद व्यथित (उत्तर प्रदेश, भारत) तथा स्वयं आयोजन की अगुवाई कर रहीं मधु खन्ना (ब्रिस्बेन/गोल्ड कोस्ट) प्रमुख रूप से शामिल रहीं।
इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों को विश्व हिन्दी परिषद के चिन्ह सहित प्रमाण पत्र प्रदान किए गए, जिससे उनका उत्साह और भी बढ़ा। कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण यह भी रहा कि ब्रिस्बेन की ग्रे स्ट्रीट, साउथ बैंक पर ११ और १२ अप्रैल को इस आयोजन के इलेक्ट्रॉनिक पोस्टर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए गए, जिसने स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया।
भारत के कौंसुलेट जनरल द्वारा उपस्थित हिन्दी प्रेमियों और साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। यह आयोजन न केवल साहित्यिक संवाद का मंच बना, बल्कि वैश्विक स्तर पर हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार का एक सशक्त माध्यम भी सिद्ध हुआ।


ब्रिस्बेन में आयोजित इस प्रथम अंतरराष्ट्रीय साहित्य चौपाल ने यह सिद्ध कर दिया कि हिन्दी केवल भारत की भाषा नहीं, बल्कि विश्वभर में अपनी पहचान बना रही एक सशक्त सांस्कृतिक धरोहर है।
परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डी पी मिश्र एवं राष्ट्रीय संपर्क समन्वयक डॉ नंद किशोर शाह का सहयोग समारोह के आयोजन में उल्लेखनीय रहा, जिन्होंने विभिन्न देशों के हिन्दी विद्वानों को जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

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