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सीने पर 21 कलश रखकर नौ दिन तक करते हैं उपवास, पटना के नागेश्वर बाबा 26 सालों से ऐसे ही कर रहे मां की पूजा

पटना : यह आस्था का अलग ही रंग है। दिल में मां की भक्ति ऐसी जगी कि बीते 26 सालों से शारदीय नवरात्र में अपने सीने पर कलश रखकर पूजा में लीन रहते हैं। ये कहानी न्यू सचिवालय स्थित नौलखा मंदिर में मां दुर्गा की पूजा करने वाले बाबा नागेश्वर की है। दरभंगा के कुशेश्वर स्थान के रहने वाले बाबा नागेश्वर की मानें तो मां का आशीष है कि ये कठिन साधना हो पाती है।

तीन साल तक मां कामाख्या मंदिर में की थी उपासना

बाबा नागेश्वर बताते हैं कि वर्ष 1985 के दौरान गुवाहटी स्थित मां कामख्या मंदिर में नवरात्र के मौके पर कठिन तपस्या की थी। लगातार तीन साल तक हर नवरात्र में मां की चौखट पर प्रार्थना करने पहुंच जाते थे। बाबा बताते हैं कि घर वालों का भी सहयोग रहा। मां की कृपा पाने के बाद रोजी-रोटी के लिए पटना आ गए। अपना पेट भरने के लिए मंदिर के पास स्थित होटलों में पानी देने का काम करते रहे, कुछ समय बाद मंदिर में नवरात्र के समय मां की पूजा आरंभ की। वर्ष 1996 से बाबा नागेश्वर हर साल अपने सीने पर कलश स्थापित कर नवरात्र में मां दुर्गा की उपासना करते हैं। पहले साल उन्होंने सीने पर एक कलश रखा था। बाद में कलशों की संख्या में बढ़ोतरी होते गई और अब सीने पर 21 कलश रखकर नवरात्र में मां की पूजा कर रहे हैं।

15 दिन पहले से आरंभ होता है अनुष्ठान

नागेश्वर की मानें तो शारदीय नवरात्र के समय होने वाले अनुष्ठान को लेकर 15 दिन पहले योगाभ्यास आरंभ कर देते हैं। इसके लिए दिन और रात मिलाकर थोड़ा-थोड़ा करते हुए अन्न और जल का इस्तेमाल कम करते हैं। नवरात्र आरंभ होने के तीन-चार दिन पहले अन्न और जल का प्रयोग नहीं के बराबर करते हैं। इसी तरह से अभ्यास करते हुए कई साल बीत गए। नवरात्र में नौ दिनों तक बगैर अन्न-पानी के रहते हैं। इस दौरान नित्य के क्रियाकलाप भी बंद हो जाते हैं। अपने सीने पर कलश लेकर नौ दिनों तक की मां की आराधना में लीन रहते हैं। 60 वर्षीय नागेश्वर बाबा बताते हैं कि ऐसा सिलसिला जारी रखे हुए यह उनका 26वां साल है। एक कलश के साथ आरंभ हुआ सिलसिला 21 कलशों के साथ तक पहुंच गया पता हीं नहीं चला। ये सब मां दुर्गा की कृपा है।

शरीर में होता है ऊर्जा का प्रभाव, आती है खूब नींद

बाबा की मानें तो नवरात्र के समय मां की आराधना करने के दौरान शरीर में किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होती है, बल्कि एक प्रकार की ऊर्जा मिलती है। वे बताते हैं कि इन नौ दिनों के अंदर खूब नींद आती है। लगता है कि मां अपने गोद में सुला रही हों। कभी-कभी मन काफी व्याकुल हो जाता है लेकिन जैसे ही मन को एकाग्र कर मां की ओर ले जाता हूं तो फिर सबकुछ सामान्य हो जाता है। उनका कहना है कि यह सब मां के आशीष के बिना संभव नहीं हो सकता।

Dr Rishikesh

Editor - Bharat Varta (National Monthly Magazine & Web Media Network)

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