नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल : पटना में झलकी भारत की सांस्कृतिक-बौद्धिक विरासत

पटना, भारत वार्ता संवाददाता : बिहार की राजधानी पटना एक बार फिर साहित्य, संस्कृति और विचारों के विराट संगम का केंद्र बनी, जब नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल 2025 का आयोजन चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान, पटना (CIMP) में भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। अमात्या फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस एकदिवसीय महोत्सव का केंद्रीय विषय था – “विश्व गुरु भारत का पुनर्निर्माण – प्राचीन विरासत से आधुनिक पाठ तक।”

देशभर के 100 से अधिक विश्वविद्यालयों और संस्थानों ने प्रत्यक्ष एवं डिजिटल माध्यम से इसमें भागीदारी की। फेस्टिवल का शुभारंभ उद्घाटन सत्र “द वॉइस ऑफ़ नालंदा” से हुआ। उद्घाटन वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. एस. सिद्धार्थ ने किया। स्वागत भाषण क्यूरेटर एवं संस्कृति शोधकर्ता वैशाली सेता ने दिया। पारंपरिक दीप प्रज्वलन के बाद वातावरण आध्यात्मिक उर्जा और संवेदना से तब भर उठा जब बाबा कुटानी, हिमालयी युवा कलाकार और भारत के पहले हैंडपैन प्लेयर ने मनमोहक प्रस्तुति दी। तत्पश्चात, कार्यक्रम के थीम और लोगो का औपचारिक विमोचन किया गया।

डॉ. एस. सिद्धार्थ

दिनकर 2.0 पर मंथन

पहला पैनल “दिनकर 2.0 – राष्ट्र, धर्म और डिजिटल युग” रहा, जिसमें राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के पौत्र ऋत्विक उदयन, CIMP के निदेशक प्रो. (डॉ.) राणा सिंह और जाने-माने लेखक रत्नेश्वर सिंह ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के विचारों की आज के डिजिटल युग और युवाओं के संदर्भ में प्रासंगिकता पर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि दिनकर का साहस, कर्तव्य, राष्ट्रनीति और धैर्य आज भी नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक हैं।

सिनेमा, रंगमंच और साहित्य का संगम

दूसरे पैनल “सिनेमा और रंगमंच में साहित्य” में स्क्रीनराइटर शुभ्रस्था और फ़िल्ममेकर शांतनु गुप्ता ने किताबों से पर्दे तक की यात्रा की रचनात्मक चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार व्यक्त किए।

युवा बहस में उठी AI की बहस

छात्रों के बीच हुए रोचक वाद-विवाद सत्र का विषय था –
“क्या आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस नई सरस्वती है या रचनात्मकता के लिए चुनौती?”
सत्र का संचालन CIMP के निदेशक प्रो. (डॉ.) राणा सिंह ने किया। देशभर की विश्वविद्यालयी टीमों के प्रभावी तर्कों के बीच सर्वश्रेष्ठ वक्ता को नालंदा यूथ ओरेटर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

मिथक, दर्शन और आधुनिकता पर विमर्श

तीसरे सत्र “मिथक, मन और आधुनिकता” का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पवन कुमार ने किया, जबकि मुख्य वक्ता रहीं लोकप्रिय लेखिका अमी गणात्रा। चर्चा में यह उभरकर सामने आया कि रामायण, महाभारत और भारतीय दर्शन आधुनिक तकनीकी युग में भी नैतिक मार्ग और आत्मचिंतन की दृष्टि प्रदान करते हैं।

साहित्य में महिलाओं की दृष्टि

अंतिम पैनल “साहित्य में महिलाओं की दृष्टि” के संवाद का संचालन आईपीएस अधिकारी विकास वैभव ने किया। इसमें शन्थेरी, माधवी कुंटे और रत्नेश्वर ने स्त्री-लेखन की संवेदना, सांस्कृतिक दृष्टि और साहित्य में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर विचार रखा।

अगले संस्करण की घोषणा

समापन सत्र के दौरान नालंदा इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल 2026 की घोषणा की गई, जिसका आयोजन 12-15 फरवरी 2026 को नालंदा विश्वविद्यालय में किया जाएगा।

नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल
Dr Rishikesh

Editor - Bharat Varta (National Monthly Magazine & Web Media Network)

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