कला -संस्कृति

बिहार के डीजी अरविंद पांडेय ने बताया‍ – संस्कृतभाषी ले सकते अल्पसंख्यकों की सुविधा

Bharat Varta Desk: बिहार सिविल डिफेंस के पुलिस महानिदेशक अरविंद पांडेय ने अपने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से कहा है कि संस्कृत बोलने वाले संविधान प्रदत्त अधिकारों के तहत अल्पसंख्यकों की सुविधा ले सकते हैं। इस योजना के तहत मंदिर के पुजारियों और वेद और गुरुकुलों को अल्पसंख्यक वाली सुविधाएं मिल सकती हैं। उन्होंने जो तरीका बताया है उसके आधार पर जिस तरह मस्जिद में नमाज पढ़ाने वाले इमाम और अजान देने वाले मुअज्जिनो के लिए सरकार की ओर से मानदेय दिए जाते हैं उसी तरह देशभर के मंदिरों के पुजारियों के लिए मानदेय दिए जाने चाहिए।

इमाम और मुअज्जिनो की तरह पुजारी मानदेय के हकदार

गौरतलब है कि इमामों को प्रत्येक माह 15000 और मोअज्जिनो को 10000 मानदेय मिलते हैं। यह सुविधा रजिस्टर्ड मस्जिदों को प्राप्त है। कई हिंदू संगठन वर्षों से इस बात की वकालत कर रहे हैं कि रजिस्टर्ड मंदिर के पुजारियों को भी मानदेय मिलना चाहिए जिनकी आर्थिक हालत बहुत ही खराब रहती है। सुबह से लेकर रात तक धार्मिक कार्यों में कठोर मेहनत और साधना के बाद भी वे जीवन के मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहते हैं।

गुरुकुल और वेद विद्यालयों को को भी मिल सकता प्रोत्साहन

इसी तरह गुरुकुल और वेद विद्यालयों के संचालन, वेद, पुराण और रामायण के पठन-पाठन को बढ़ावा देने के लिए भी अल्पसंख्यक वाली सुविधाएं सरकार से ली जा सकती है। संसाधन के अभाव में देश भर में ऐसे संस्थान मृतप्राय हो चले हैं। इसके चलते नई पीढ़ी वेद, पुराण कर्मकांड, पुरोहिती, ज्योतिषा और हिंदू धर्म और संस्कृति के विभिन्न विधाओं में पारंगत नहीं हो पा रही है। इसके चलते हिंदू संस्कृति और संस्कार समाज से दूर होते जा रहे हैं। इसका दुष्प्रभाव समाज में अनेक प्रकार की विद्रूपताओं के रूप में देखने को मिल रहा है।
बिहार के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अरविंद पांडेय ने अपने फेसबुक पोस्ट में जो संविधान सम्मत विचार साझा किया है उस पर अमल करके इन सारी समस्याओं का निराकरण किया जा सकता है।

कैसे लें सुविधा

उन्होंने लिखा है कि संस्कृत बोलने वाले संविधान के अनुच्छेद 30 के अनुसार भाषायी अल्पसंख्यक हैं..इसलिए, उन्हें अपना शिक्षण संस्थान अर्थात गुरुकुल संचालित करने, उसमें अपनी भाषा और ग्रंथों को पढ़ाने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।
इस प्रकार गुरुकुलों को स्थापित करने, उसमें गीता, रामायण आदि शास्त्र के पठन पाठन हेतु उन्हें उन सुविधाओं को प्राप्त करने का संवैधानिक अधिकार है जो अन्य अल्पसंख्यकों को प्राप्त है।

आरएसएस की योजना को भी लग सकती है पंख

बता दें कि पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस ने देशभर में हजारों गुरुकुल खोलने की विशेष योजना का ऐलान किया है। इस योजना के तहत देशभर में बच्चों के लिए नए गुरुकुल की स्थापना की जानी है। अल्पसंख्यक प्रोत्साहन नीति की तहत संघ कि इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए केंद्र और राज्य की सरकारें आर्थिक मदद दे सकती हैं। इसके साथ अभी जो गुरुकुल चल रहे हैं उनकी स्थिति को सुधारने के साथ-साथ उन्हें विकसित करने में भी अल्पसंख्यक नीति के तहत बहुत कुछ किया जा सकता है। भारत के वैदिक संदेशों को दुनिया भर में प्रचारित और प्रसारित करने के लिए वेद विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की स्थापना भी अल्पसंख्यक नीति के तहत की जा सकती है।

Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

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