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विश्व हिंदी परिषद के “भारत को जानो” कार्यक्रम में भारतबोध की अनुगूंज,18 देशों के प्रतिनिधियों ने हिंदी व भारतीय संस्कृति को सराहा

Bharat varta Desk

हिंदी भाषा के वैश्विक विस्तार और भारतीय संस्कृति के आत्मीय प्रसार की दिशा में विश्व हिंदी परिषद द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम “भारत को जानो” ने यह सिद्ध कर दिया कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और आत्मा है। यह भावपूर्ण कार्यक्रम 24 दिसंबर 2025 को परिषद प्रांगण, नोएडा में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार ने की। इस अवसर पर परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देवी प्रसाद ने उपस्थित भारतवंशियों को ‘भारत’ और ‘इंडिया’ के बीच के वैचारिक एवं सांस्कृतिक अंतर को विस्तार से समझाया।
इस मौके पर 18 देशों से आए सभी विदेशी प्रतिनिधियों ने एक स्वर में विश्व हिंदी परिषद द्वारा हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन एवं वैश्विक प्रसार के लिए किए जा रहे समर्पित और सतत प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि “भारत को जानो” जैसे कार्यक्रम उन्हें भारत की आत्मा, उसकी परंपराओं, जीवन मूल्यों और मानवीय दृष्टिकोण से गहराई से जोड़ते हैं।
कार्यक्रम के दौरान सभी विदेशी प्रतिनिधियों का पारंपरिक, आत्मीय और अत्यंत गर्मजोशी से स्वागत किया गया। भारतीय आतिथ्य, स्नेह और संस्कारों से अभिभूत प्रतिनिधियों ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया। कई प्रतिनिधियों ने हिंदी भाषा को सीखने तथा अपने-अपने देशों में इसके प्रचार-प्रसार का संकल्प भी व्यक्त किया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. विपिन कुमार ने हिंदी भाषा को विश्व भाषा के रूप में स्थापित करने की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, दर्शन और आत्मिक चेतना की वाहक है। उन्होंने भारतीय संस्कृति के व्यापक फलक, उसकी सहिष्णुता, विविधता और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना पर भी विस्तार से चर्चा की।

राजस्थान प्रभारी श्रीकुमार लखोटिया ने संयोजक के रूप में कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावी संचालन किया।विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. श्रवण कुमार ने सभी अतिथियों एवं सहभागियों का आत्मीय स्वागत किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री कृष्ण माँ जलपा भवानी गौशाला समिति के अध्यक्ष श्री राजीव लोचन ने अत्यंत जिम्मेदारीपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ज्योति कलश ने ‘वंदे मातरम्’ का ओजस्वी काव्य-पाठ प्रस्तुत कर सबको भावविभोर कर दिया।

Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

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