धर्म/अघ्यात्म

बटेश्वर की खुदाई में मिला विशाल शिवलिंग

  • शिव शंकर सिंह पारिजात, उप जनसंपर्क निदेशक (अवकाश प्राप्त), सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, बिहार सरकार।

NewsNLive Special Report: भागलपुर जिला के कहलगांव अनुमंडल में विक्रमशिला बौद्ध महाविहार के निकट गंगातट पर स्थित बटेश्वर स्थान की प्रसिद्धि न सिर्फ अंगदेश, वरन बिहार के एक महत्वपूर्ण शैवस्थल के रूप में रही है। यहां बटेश्वर पहाड़ी पर शिवस्वरूप बाबा बटेश्वर का मंदिर स्थित है जिनके प्रति लोगों की अगाध आस्था है।

यहां शिव मंदिर के सामने पार्वती मंदिर की बजाय देवी काली का मंदिर है। इस कारण बटेश्वर की मान्यता शैवस्थल के साथ एक तंत्र-पीठ के रूप में भी है। बटेश्वर की महत्ता ऋषि-मुनियों व साधकों को तपोस्थली को लेकर भी है। 84 सिद्धों की परम्परा के महत्वपूर्ण अध्याय यहां से जुड़े रहे हैं। बटेश्वर की महत्ता को इस बात से भी समझा जा सकता है कि विक्रमशिला बौद्ध महाविहार के संस्थपक पाल-वंशीय राजा धर्मपाल ने यहां की प्राकृतिक सुषमा व स्थलीय विशिष्टताओं को देखकर ही इसके निकट विक्रमशिला विहार बनाने के निर्णय लिये थे।

न सिर्फ धर्म एवं आध्यात्म, वरन पुरातात्विक दृष्टि से भी से भी बटेश्वर की महत्ता रही है। बटेश्वर के शिलाखंडों पर उत्कीर्ण प्राचीन मूर्तियों की चर्चा कनिंघम, फ्रांसिस बुकानन, एन एल डे, डॉ. डीआर पाटिल सरीखे विद्वानों ने की है। बटेश्वर के बारे में पुराविदों का मत है कि यहाँ सेन राजाओं का जय स्कंधावर स्थित था।

विगत दिनों बटेश्वर मंदिर की पहाड़ी के नीचे एक खुदाई के दौरान एक विशाल प्राचीन शिवलिंग मिला है जो इस स्थल के एक प्रमुख शैवस्थल होने की बात को पुनः प्रमाणित कर रहा है। ऐसे बटेश्वर पहाड़ी के आसपास कई प्राचीन शिवलिंग उत्कीर्ण हैं।

बटेश्वर शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि ये वशिष्ठ मुनि द्वारा स्थापित हैं, जिसके कारण ये वशिष्ठेश्वर नाथ महादेव कहलाये जो कालक्रम में आज बटेश्वर नाथ के नाम से जाने जाते हैं। पुरातनकाल में यहां भव्य रूप से ‘वर्षावर्द्धन समारोह’ का आयोजन होता था जिसमें शिवलिंग पर जल की वर्षा की जाती थी। आज यह परम्परा अंगक्षेत्र में श्रावणी मेले के रूप में विद्यमान है जब श्रावण मास में लाखों कांवरियां शिवभक्त सुलतानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा का जल अपने कांवरों में लेकर इसे देवघर स्थित वैद्यनाथ द्वादश ज्योतिर्लिंग पर अर्पित करते हैं।

बटेश्वर की हालिया खुदाई में प्राचीन शिवलिंग की प्राप्ति के साथ यहाँ की समृद्ध प्राचीन परम्पराओं के संदर्भ पुनः जीवंत हो उठे हैं। इसपर यथाशीघ्र सम्यक शोध एवं विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता है।

चित्र सौजन्य: मोलू साह

Dr Rishikesh

Editor - Bharat Varta (National Monthly Magazine & Web Media Network)

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