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तकनीक ने इंसानी जीवन को बनाया बंधक- पटना कॉलेज के सेमिनार में बोले प्राचार्य तरुण कुमार

Bharat varta desk:

इतिहास विभाग, पटना कॉलेज और प्रज्ञा फ़ाउंडेशन के संयुक्त तत्त्वाधान में “तकनीक, व्यापार और पर्यावरण: एक परिवर्तनीय प्रक्रिया का शाश्वत विकास” विषय पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन पटना कॉलेज के सेमिनार हॉल में किया गया। उद्घाटन समारोह के अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य प्रो तरुण कुमार ने बताया कि कैसे तकनीक ने इंसानी जीवन को बंधक बना लिया है। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि सतत विकास का विचार आज के नीति-निर्माण एवं राजनीति से प्रेरित है। बाजारवाद इस कदर हावी हो गया है कि वो आमजन की रूचियों को प्रभावित करने के साथ उनकी राजनीतिक सोच को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है।

पर्यावरण परिवर्तन को इतिहासकार बर्नी ने दिया महत्व-प्रोफेसर इम्तियाज अहमद

मध्यकालीन भारत में उक्त विषय पर अपनी बात रखते हुए पूर्व शिक्षक और खुदा बख्श ओरिएंटल पुस्तकालय के पूर्व निदेशक प्रो. इम्तियाज अहमद ने बताया कि यमुना से कई नहरें निकालने के बाद सल्तनत काल में दिल्ली के आस-पास के पर्यावरण में हुए परिवर्तन को समकालीन इतिहासकार बर्नी ने काफ़ी महत्त्व दिया है। इतिहास विभाग के पूर्व शिक्षक प्रो प्रमोदानंद दास ने कहा कि तकनीक पर नियंत्रण स्थापित कर पूंजीवादी देशों ने किस प्रकार पिछड़े देशों की संप्रभुता का अतिक्रमण किया है। पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय के प्रो अविनाश कुमार झा ने अपने कीनोट वक्तव्य में बताया कि समय के साथ व्यापार, तकनीक और पर्यावरण एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़ गए हैं और एक में बदलाव का असर दूसरे पर होना अनिवार्य हो गया है। जेपी विश्वविद्यालय के प्रो अभय कुमार ने सिलसिलेवार ढंग से बताया कि जब तक पर्यावरण-सहगामी तरीके नहीं अपनाए जाते तब तक सतत विकास को सुनिश्चित नहीं किया जा सकता है। स्वागत भाषण इतिहास विभाग, पटना कॉलेज के अध्यक्ष अविनाश कुमार ने दिया।

धन्यवाद ज्ञापन विभाग के शिक्षक डॉ नीतीश कुमार विमल ने किया। कार्यक्रम का संचालन विभाग के ही विद्यार्थी आबिस हसन ने किया। कार्यक्रम में कॉलेज के शिक्षकों- डॉ अशरफ,डॉ मायानंद, डॉ सुमन, डॉ प्रेम शंकर, डॉ सुमन, डॉ अदिति, डॉ सतीश पटेल, डॉ उर्वशी, डॉ मंजरी और विद्यार्थियों की भारी सहभागिता को देखते हुए हर मंचस्थ अतिथियों ने कॉलेज की बौद्धिक जीवंतता को सराहा। कार्यक्रम के दौरान ही उक्त विषय पर प्रकाशित किताब का विमोचन भी किया गया।

Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

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