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पुरातात्विक अवशेषों में नीतीश की रुचि, चमकेगा अंग का इतिहास, जानिए कैसे…..

भागलपुर संवाददाता: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रविवार को ऐतिहासिक अवशेषों को देखने नवगछिया के गुवारीडीह हेलीकॉप्टर से पहुंचे. पिछले दिनों उत्खनन के दौरान मिले प्राचीन सभ्यता के अवशेषों का निरीक्षण किया. पुरातत्व विभाग की ओर से अवशेषों को स्टॉल पर सजा कर रखा गया था. सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन अवशेषों को सुरक्षित और संरक्षित करें. बता दें कि बिहपुर प्रखंड के रामपुर पंचायत के गुवारीडीह में बाढ़ का पानी हटने के बाद लोगों ने 25 फीट ऊंचे टीले को देखा था. वहां की मिट्टी हटाई गई तो मिट्टी के बर्तन, ताम्र धातु के टुकड़े, सिल्ला लोढी, हैंडल युक्त बर्तन, चौड़े आकार की टेराकोटा की मूर्तियां आदि पाए गए। पुरातत्व विभाग की टीम और इतिहासकारों ने इन सामानों को 1000 ईसा पूर्व से लेकर 12वीं शताब्दी का माना है. यह स्थान कोसी के किनारे हैं और कटाव के मुहाने पर है. 12 को भदरिया आए थे मुख्यमंत्रीइसके पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 12 दिसंबर को बांका जिले के भादरिया गांव में बुद्ध कालीन अवशेषों को देखने आए थे. चानन नदी के किनारे मिले इन अवशेषों को देखने से पता चलता है कि बौद्ध काल में अंग क्षेत्र में एक समृद्ध सभ्यता और संस्कृति का विकास हुआ. इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा था कि इतिहास के जानकारों के अनुसार यहां महात्मा बुद्ध भी आए थे. मुख्यमंत्री जमुई के लछुआड़ स्थित भगवान महावीर के जन्मस्थान पहुंचे और वहां हो रहे निर्माण कार्य को देखा. सीएम के दौरे से जगी उम्मीदें पुरातात्विक अवशेषों के प्रति मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने काफी दिलचस्पी दिखाई है. उन्होंने पुरातत्व विभाग की टीम से इलाके के पूरे इतिहास की जानकारी दी है. कुछ दिन पहले भागलपुर जिले के साथ खून में बुद्ध कालीन मूर्ति भी मिली है. पिछले दो-तीन सालों में भागलपुर, बांका, लखीसराय, मुंगेर, जमुई जिलों में खुदाई के दौरान करीब 20 जगहों पर प्राचीन इतिहास और संस्कृति से संबंधित महत्वपूर्ण अवशेष मिले हैं. पुरातत्व विभाग की टीम ने सभी जग्गू पर जाकर सर्वे रिपोर्ट तैयार किया है. इसकी पूरी जानकारी मुख्यमंत्री को दी गई है. इतिहासकारों का कहना है कि इन सभी ऐतिहासिक स्थलों का योजनाबद्ध ढंग से खुदाई कराई जाए तो इतिहास की कई नई जानकारियां सामने आएंगी. जमीन से मिले अवशेषों को सही ढंग से संरक्षित करने की जरूरत है. इतिहासकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री की दिलचस्पी के बाद यह उम्मीद जगी है कि सरकार इस संबंध में कुछ ऐसा काम करेगी ताकि अंग के महान धरोहर सुरक्षित हो सकेंगे.

Kumar Gaurav

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