
पटना, भारत वार्ता संवाददाता : बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के 44वें महाधिवेशन की तैयारी जोर-शोर से शुरू हो गई है। यह दो दिवसीय आयोजन आगामी 20-21 दिसम्बर 2025 को पटना में होने जा रहा है। महाधिवेशन की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने हेतु सम्मेलन अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ द्वारा विगत कार्यसमिति की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार प्रसिद्ध नेत्र-रोग-विशेषज्ञ, कवि एवं बिहार विधान परिषद के सदस्य डॉ. राजवर्धन आज़ाद की अध्यक्षता में 72 सदस्यीय स्वागत समिति का गठन किया गया है।
स्वागत समिति का गठन
नई समिति में 45 उपाध्यक्ष और 22 महासचिव शामिल हैं, जिनमें राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती अप्सरा भी उपाध्यक्ष के रूप में शामिल हैं।
समिति का उद्देश्य महाधिवेशन में आने वाले गणमान्य साहित्यकारों का स्वागत-सत्कार, आवास-व्यवस्था तथा विभिन्न कार्यक्रमों का सुचारु संचालन सुनिश्चित करना है।
डॉ. राजवर्धन आज़ाद की उपलब्धियाँ
डॉ. आज़ाद एक कुशल नेत्र-चिकित्सक के रूप में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हैं। वे एम्स, नई दिल्ली के डॉ. आर. पी. सेंटर फॉर ऑप्थलमिक साइंसेज़ के प्रमुख रह चुके हैं तथा समाज के गरीब एवं पिछड़े वर्गों की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दे चुके हैं।
वे भारत सरकार के नेशनल ब्लाइंडनेस प्रोग्राम के सलाहकार रहे हैं और चाइल्डहुड ब्लाइंडनेस प्रोग्राम को प्रभावी बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई है।
डॉ. आज़ाद एशिया पैसिफिक अकादमी ऑफ ऑप्थलमोलॉजी के अध्यक्ष बनने वाले भारत के प्रथम नेत्र चिकित्सक हैं तथा माननीय राष्ट्रपति के ऑनरेरी फिजिशियन भी रहे हैं। साहित्य के क्षेत्र में भी उनकी उल्लेखनीय उपस्थिति रही है। उनका लघुकथा संग्रह ‘सोने का हाथ’, अंग्रेज़ी कविता संग्रह ‘Poems on Board’ और हिंदी कविता संग्रह ‘नीम का शहद’ विशेष रूप से चर्चित रहे हैं।
दो दिवसीय साहित्यिक महाकुंभ
महाधिवेशन के दौरान उद्घाटन एवं समापन-सह-अलंकरण समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त छः वैचारिक सत्रों का आयोजन होगा, जिनमें साहित्य से जुड़े विविध विषयों पर विशिष्ट वक्ता अपने विचार रखेंगे। साथ ही एक विराट कवि सम्मेलन तथा रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जाएंगे। यह पूरा समारोह पटना में संपन्न होगा।
नवगठित स्वागत समिति
अध्यक्ष: डॉ. राजवर्धन आज़ाद
उपाध्यक्ष: पद्मश्री विमल कुमार जैन, श्रीमती अप्सरा, पारिजात सौरभ, सरदार महेन्द्र पाल सिंह ढिल्लन, डॉ. मेहता नगेंद्र सिंह, डॉ. किरण सिंह, डॉ. भावना शेखर, ई. अवध बिहारी सिंह, डॉ. सुधा सिन्हा, प्रो. सुनील कुमार उपाध्याय, शुभचंद्र सिन्हा, डॉ. पंकज पाण्डेय, डॉ. सीमा रानी, डॉ. पंकज कुमार ‘बसंत’, ज्ञानेश्वर शर्मा सहित कुल 45 सदस्य।
महासचिव: शशि भूषण कुमार, आनन्द मोहन झा, नीरव समदर्शी, डॉ. सुषमा कुमारी, अनुभा गुप्ता, रौली कुमारी, सुनीता रंजन, डॉ. अनुपमा सिंह, नीता सहाय, संजीव मिश्र, तलअत परवीन, डॉ. पुरुषोत्तम कुमार आदि कुल 22 सदस्य।
सचिव: सूर्य प्रकाश उपाध्याय, राजेश राज, नेहाल कुमार सिंह ‘निर्मल’, अमित कुमार सिंह एवं रोहित कुमार।
साहित्यिक जगत में इस आयोजन को लेकर उत्साह का माहौल है और यह महाधिवेशन एक साहित्यिक महाकुंभ के रूप में देखा जा रहा है।
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