साहित्य संसार

‘अधजल गगरी, छलकत जाए’, रेल अधिकारी दिलीप कुमार का कॉलम ‘अप्प दीपो भव’

अप्प दीपो भव-18

-दिलीप कुमार (कवि, लेखक, मोटिवेशनल स्पीकर और भारतीय रेल यातायात सेवा के वरिष्ठ अधिकारी)

मनुष्य कर्म से बड़ा बनता है, शोर मचाने से नहीं। अपनी महिमा का बखान करने वाले कितने भी पोस्टर हम क्यों न छपवा लें, अपनी स्तुति में किताब भी लिखवा लें या ढोल बजाकर ढिंढोरा पिट लें, कोई फर्क नहीं पड़ता। हमारे आसपास के लोग हमारी हकीकत जानते हैं। यदि हम अंदर से ठोस और सच्चे नहीं होंगे, तो बड़े-बड़े मंचों पर भी हमें मुंह की खानी होगी। बिना कुछ किए तारीफ़ पाने की आकांक्षा में उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर कहने वाले लोगों को अंत में बदनामी के सिवा कुछ नहीं मिलता। पच्चीस-पचास पैसे का सिक्का हमेशा आवाज करता है, खनकता रहता है। लेकिन 1000/2000 रुपए का नोट खामोशी से आपकी जेब में पड़ा रहता है। जब जरूरत होती है तो शांत भाव से जेब से निकलता है और अपना काम करता है। समय पर अपनी उपयोगिता सिद्ध करके वह प्रतिष्ठा पाता है। सिक्का कितना भी खनकता रहे, उसका वास्तविक मूल्य उतना ही रहेगा, जितना उस पर अंकित है। नोट कितनी भी खामोशी से काम करे, उसका वास्तविक मूल्य कम नहीं हो जाएगा।
आपने भी अपने आसपास खनकते रहने वाले अनेक लोगों को देखा होगा। ऐसे लोग सफलता मिलने से पहले ही खुद को शमशीर घोषित कर देते हैं। ऐसे लोग चार पंक्तियां मुश्किल से लिखते हैं और खुद को कबीर से भी बड़ा कवि मान लेते हैं। लेकिन जीवन की सच्चाई यही है कि खु़द ही मान लेने से कोई भी व्यक्ति खु़दा नहीं बन जाता।
हमारी उपलब्धियों को जब सामाजिक और प्रशासनिक स्वीकृति मिलती है, तभी हमें सफल माना जाता है। बिना स्वीकृति के प्राप्त की गई सफलताएं काल्पनिक उड़ान का ही हिस्सा होती हैं।
एक कहावत है- थोथा चना, बाजे घना ।
जो लोग गुणहीन अथवा कम गुणी होने होने के बावजूद भी अपने गुणों को बढ़ा चढ़ाकर बताते रहते हैं, ऐसे लोगों को देखकर बरबस ही यह कहावत लोगों की जुबान पर आ जाती है। ऐसे लोगों के लिए एक कहावत अंग्रेजी भाषा में भी है- An empty vessel sounds much. यानी खाली बर्तन ज्यादा ढनमनाता है। आडंबर की प्रवृत्ति रखने वाले लोगों के लिए हिंदी क्षेत्रों में एक और कहावत प्रचलित है-
अधजल गगरी, छलकत जाए पूरी गगरिया चुपके जाए

जब पात्र में जल कम होता है, तब उस पात्र का जल छलकता रहता है। यदि बर्तन पूरी तरह से भर जाता है तो फिर वह छलकना बंद कर देता है। अधजल गगरी अल्प ज्ञानी मनुष्य का प्रतिनिधि है। अल्प ज्ञानी लोग अपने आप को महान साबित करने के लिए अपने ज्ञान का अवांछित प्रदर्शन करते रहते हैं। इस प्रयास में वह खुद को ज्ञानी तो साबित नहीं कर पाते, अज्ञानी अवश्य ही साबित कर लेते हैं। पूर्ण ज्ञानी व्यक्ति कभी भी अपने ज्ञान का प्रदर्शन नहीं करता। वस्तुतः ज्ञान प्रदर्शन की चीज भी नहीं है। ज्ञान और ज्ञानी मनुष्य की महिमा सत्य की धरातल पर स्थापित होती है। उसमें थोड़ा वक्त लगता है। लेकिन जब ज्ञान की महिमा स्थापित हो जाती है, तो फिर वह चिरंजीवी होता है।

Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

Recent Posts

सीएम नीतीश के समृद्ध यात्रा के दौरान विस्फोट, एक की मौत

Bharat varta Desk सिवान जिले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के बीच एक… Read More

2 days ago

आईएएस संजीव दिल्ली नगर निगम के कमिश्नर

Bharat varta Desk आईएएस संजीव खिरवार (IAS Sanjeev Khirwar) को दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) का… Read More

3 days ago

नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष

Bharat varta Desk नितिन नबीन को आज आधिकारिक रूप से पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन… Read More

4 days ago

कर्नाटक के डीजी सस्पेंड

Bharat varta Desk कर्नाटक के डीजीपी और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रामचंद्र राव को सस्पेंड कर… Read More

4 days ago

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मालदा में नई ट्रेनों को झंडी दिखलाई

Bharat varta Desk प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज पश्चिम बंगाल के मालदा रेलवे स्टेशन से… Read More

7 days ago

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव 20 को

Bharat varta Desk भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए चुनाव की तारीख… Read More

1 week ago