Bharat Varta Desk : सियासत हर समय अपने रंग-ढंग बदलती रहती है। शब्द-शब्द सियायत करने वाले नेताओं की पैनी नज़र हमेशा सियासी गलियारों की हर तब्दीलियों ओर तनी हुई होती है, इसलिए ऐसे नेता व प्रवक्ता हर छोटे-बड़े तब्दीलियों को अपने लफ़्जों से नवाज़ते रहते हैं। ऐसे ही शब्द-शब्द सियायत करने वाले नेता हैं जदयू के विधान पार्षद नीरज कुमार। वे जदयू के प्रवक्ता भी हैं। नीरज कुमार ने सियासी तब्दीलियों के अनुसार अब राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को ‘कारित मुजरिम’ कहकर संबोधित किया है। इससे पहले वे चारा घोटाला के चार मामलों में सजायाफ्ता लालू यादव के लिए ‘कैदी नं. 3351’ का संबोधन कहा करते थे।
जदयू प्रवक्ता व विधान पार्षद नीरज कुमार अक्सर प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया में लालू यादव को ‘कैदी नं. 3351’ कहकर ही संबोधित किया करते थे। उन्होंने लालू यादव को कैदी नं. 3351 बताते हुए एक पत्र भी लिखा था, जिसमें पता जेल अधीक्षक, बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, रांची का दिया गया था। तब इस पत्र की राजनीति पर राजद नेताओं ने कहा था कि जदयू के लोग लालू फोबिया से ग्रसित हैं। नीरज कुमार जैसे लोग समाचार में बने रहने के लिए इस तरह के ढोंग रचते रहते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है।
बता दें कि जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने शुक्रवार को अपने ट्विटर और फेसबुक पर वीडियो के माध्यम से एक बयान जारी किया है, जिसमें उन्होंने वीडयो में ‘कारित मुजरिम लालू प्रसाद जी’ कहकर संबोधित किया है। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि “कारित मुजरिम लालू प्रसाद जी! आपके कार्यकाल में लंदन से अत्याधुनिक चिकित्सीय उपकरणों से सुसज्जित एम्बुलेंस आया था उसे आपने गरीब रैला में इस्तेमाल कर तबाह कर दिया था। सीएजी ने सवाल उठाया था याद है न! आपने 123 चरवाहा विद्यालय खोल सर्वनाश किया, मेडिकल कॉलेज खोलने में शर्म आ रही थी।”
जदयू प्रवक्ता ने ‘भारता वार्ता’ को बताया कि क्यों किया ‘कारित मुजरिम’ नामकरण
जब इस बाबत ‘भारता वार्ता’ टीम के सदस्य द्वारा जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार से दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि ‘कैदी नं. 3351’ लालू प्रसाद यादव अभी जमानत पर जेल से बाहर आ गए हैं। इसलिए अब उन्होंने उनके लिए ‘कारित मुजरिम’ का संबोधन किया है। उन्होंने बताया कि ‘कारित मुजरिम’ का अर्थ होता है – जो स्थाई तौर पर अपराधी हो। चुकी लालू यादव को चारा घोटाला मामले में स्थाई तौर पर न्यायालय के द्वारा दंडित किया गया है और वे सजायाफ्ता हैं। इसलिए उन्हें ‘कारित मुजरिम’ ही कहा जाना चाहिए।
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