
पटना : नवाचार और समावेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, अमात्य फाउंडेशन अंतर्गत ग्रैंड ट्रंक रोड इनिशिएटिव्स (जीटीआरआई) द्वारा पटना में “आइडियाज़ फॉर बिहार (आईएफबी) 4.0” का आयोजन किया गया। पूर्वी भारत के अपनी तरह के इस पहले टेक समिट में प्रौद्योगिकी, लैंगिक समानता और परस्पर सहयोग के ज़रिए बिहार में तकनीक आधारित प्रगति को गति देने के इरादे से नीति निर्माता, टेक विशेषज्ञ समेत वैश्विक पहचान वाले एक्सपर्ट्स तथा जमीनी स्तर पर बदलाव के वाहकों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।
इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ ऐस्ट्रोफिज़िक्स की डॉ. अन्नपूर्णी सुब्रह्मण्यम ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हालिया सालों में अधिक से अधिक लड़कियाँ उच्च शिक्षा में विज्ञान को मुख्य विषय के रूप में अपना रही हैं। इतना ही नहीं, लड़कियाँ रिसर्च में में भी पहले की तुलना में ज्यादा रुचि दिखा रही हैं। जिस तरह से लड़कियाँ दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं में विज्ञान संकाय में साल-दर-साल बेहतर कर रही हैं, उसे देखते हुए मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में अधिक से अधिक महिलाओं की ऐस्ट्रोफिज़िक्स समेत अन्य विज्ञान विषयों और शोध में भागीदारी बढ़ेगी।
इस एक दिवसीय मेगा समिट को तीन तकनीकी सत्रों में विभाजित किया गया था। इसके तहत तकनीकी जगत में शीर्ष स्तर पर महिला नेतृत्व की कमी के लिए ज़िम्मेदार कारकों, टेक उद्योग में पुरुष-महिला प्रतिनिधित्व को लेकर गहरी असमानता तथा उसे पाटने संबंधी कारगर उपायों एवं महिलाओं के हाथों में आर्थिक स्रोत होने के संभावित लाभ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। सभी पैनल चर्चाओं में केवल महिलाओं की भागीदारी भी इस कार्यक्रम की एक और उल्लेखनीय विशेषता रही। इसमें शामिल होने वाली प्रमुख टेक नेत्रियों में नेमेसिसा उज्जैन (द सर्कल), शिखा सुमन (क्योरबे), डॉ. अन्नपूर्णी सुब्रह्मण्यम (भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान), रुबिता मगर (मैच24ऑर्बिटल्स, नेपाल), डॉ. सबीन कपासी (एनिरा कंसल्टेंसी), नितिका अग्रवाल (पेगासस फिनइन्वेस्ट), रश्मि दयामा (लियो कैपिटल) आदि शामिल हैं। साथ ही, प्रसिद्ध महिला टेक उद्यमियों – श्री लक्ष्मी (किक्स्की स्पेस टेक एक्सीलरेटर), श्री सुप्रयानी (अंडुरा-एक्स), और मिली श्रीवास्तव (डियाजियो इंडिया) द्वारा तीनों सत्रों का संचालन किया गया।
समिट के लक्ष्यों पर प्रकाश डालते हुए, जीटीआरआई के क्यूरेटर अदिति नंदन ने कहा कि यह सिर्फ एक समिट नहीं है, बल्कि यह एक आह्वान है। आईएफ़बी 4.0 एक ऐसा मंच है जहाँ हमने केवल चर्चा नहीं की, अपितु आने वाले समय में चर्चा से निकले मुख्य विचारों को वास्तविकता में बदलने का काम भी किया जाएगा। बिहार की महिलाएं अब और इंतजार करने को तैयार नहीं; वे मौजूदा हालात को बदलने और बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। कई महिलाएँ अपनी लगन और कौशल के बलबूते पहले से ही इस दिशा में पहले ही मज़बूती से क़दम बढ़ा चुकी हैं।
उन्होंने आगे कहा कि बिहार, जहाँ की 58% आबादी 25 साल से कम उम्र की है, एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। इस समिट के जरिए हमने तकनीकी क्षेत्र में महिलाओं की सक्रिय एवं सार्थक भागीदारी से जुड़े कुछ बेहद जरूरी मुद्दों को संबोधित करने का प्रयास किया। एक अनुमान के अनुसार, डिजिटल साक्षरता में 1% की वृद्धि से 9,000 करोड़ रुपये का संभावित आर्थिक लाभ हो सकता है। इसी प्रकार, एग्री-टेक जीडीपी में कृषि के योगदान को 18% से 35% तक बढ़ा सकता है। इसके लिए हम सभी को मिलकर समुचित प्रयास करने की आवश्यकता है, वरना बिहार भारत की 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दौड़ में पीछे रह जाएगा।
जमुई विधायक एवं मशहूर महिला निशानेबाज श्रेयशी सिंह ने बतौर विशिष्ट अतिथि इस महिला केंद्रित समिट में शिरकत करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में बिहार में ढेर सारे बदलाव हुए हैं और महिलाएं हर क्षेत्र में बेहतर कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले महिला खिलाड़ियों को उचित सम्मान नहीं मिलता था, लेकिन अब न सिर्फ उन्हें सम्मान मिल रहा है बल्कि बड़ी संख्या में लड़कियाँ खेल को अपना करियर भी बना रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि आज जब बिहार की लड़कियाँ उन्हें प्रेरणास्रोत के रूप में देखती हैं और खेलकूद में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं, तो उन्हें प्रसन्नता के साथ-साथ बिहार के उज्ज्वल भविष्य में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को लेकर भरोसा भी बढ़ता है।
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