
पटना भारत वार्ता संवाददाता:
पटना हाईकोर्ट ने बिहार की हालत को कभी जंगलराज वाला बता दिया था जिसकी आज भी चर्चा होती है। लेकिन अब पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार के सिस्टम को बिना दिमाग वाला बता दिया है। शिक्षा विभाग के एक मामले में रिटायर्ड शिक्षाकर्मी की याचिका पर सुनवाई करते हुए
न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह की एकल पीठ ने यह टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि उसकी नजर में भारत के संविधान में परिभाषित कोई भी संस्था
इतनी बे-दिमाग की यानी माइंडलेस होकर काम नहीं कर सकती, जितना बिहार सरकार कर रही है। समस्तीपुर महिला कॉलेज के रिटायर्ड रोकड़पाल के वेतनमान निर्धारण से जुड़े मामले पर सुनवाई करने के दौरान कोर्ट ने यह टिप्पणी की। कोर्ट ने रिटायर्ड कर्मचारी को 3 महीने के भीतर बकाया राशि के भुगतान का आदेश शिक्षा विभाग को दिया है। यही नहीं कोर्ट ने शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को ₹20000 का जुर्माना भी लगा दिया है।
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