
पटना भारत वार्ता संवाददाता: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दरबार में सोमवार को सुपौल से पहुंचे अनिल कुमार सिंह की शिकायतों ने सबको चौंका दिया। बकौल अनिल भ्रष्टाचार के 51 शिकायतों को लेकर वह जनता दरबार में आए हैं। कुल 536 पेज में सुपौल जिले की सरकारी भ्रष्टाचार की कहानी है। यह पुलिंदा मुख्यमंत्री को सौप कर अनिल ने इसकी जांच कराने की मांग की। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि मुख्यमंत्री ने उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना और सामान्य प्रशासन विभाग को इसकी जांच करने का निर्देश दिया। सामान्य प्रशासन विभाग ने अनिल को फिर से शाम को आने को कहा है ताकि डिटेल में शिकायतों को समझ सके। अनिल ने मुख्यमंत्री से सुपौल के वर्तमान डीएम महेंद्र कुमार और पूर्व डीएम बैजनाथ यादव के कार्यकाल में हुए काम की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इन दोनों जिलाधिकारियों के कार्यकाल में स्वास्थ्य, शिक्षा, आपदा प्रबंधन के काम और दूसरी विकास योजनाओं में जितने घपले हुए हैं उनका डिटेल ब्यौरा देते हुए जांच कराने का अनुरोध मुख्यमंत्री से किया है। अनिल ने इस बात को लेकर रोष जाहिर किया कि वह कई सालों से मुख्यमंत्री के जनता दरबार में और मुख्य सचिव को शिकायतों का पुलिंदा देते आ रहे हैं मगर केवल अधिकारी रिपोर्ट मांग कर रह जाते हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय से भी मुख्य सचिव को इस मामले की जांच करने को कहा गया था मगर सारे अधिकारी मिले हुए हैं। इसीलिए सुपौल में हो रहे भ्रष्टाचार की जांच नहीं हो रही है। अनिल ने कहा कि सुपौल एक शांत जिला है। पटना से दूर है इसलिए अधिकारी वहां जमकर गड़बड़ी कर रहे हैं। कोई रोकने- टोकने वाला नहीं है।
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