
पटना : बिहार में लाखों लोग पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। ग्रामीण एवं कुटीर उद्योगों में उत्पादित सामग्रियों का संबंध हमारी संस्कृति और तीज-त्योहारों से रहा है। दीपावली और छठ जैसे त्योहारों की शुद्धता और पवित्रता के मद्देनजर हमें ज्यादा से ज्यादा सामान पारंपरिक बुनकरों, कारीगरों और शिल्पियों से खरीदना चाहिए। खादी मॉल में शॉपिंग करने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुप्रसिद्ध लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने कहा कि दीपावली और छठ जैसे त्योहार खुशियां मनाने के लिए है। हम सब त्यौहार की खुशियां इस तरह से मनाई की ज्यादा से ज्यादा लोगों के घरों में रोशनी फैल सके। मैथिली ठाकुर ने कहा कि पारंपरिक रूप से हम छठ मनाने के लिए हम सभी ग्रामीण शिल्पियों द्वारा बनाए गए सूप, डलिया, चूल्हा, दीपक आदि का इस्तेमाल करते हैं। दीपावली में भी हम ज्यादा से ज्यादा मिट्टी के दीए जलाएं जिससे दिवाली की पवित्र भावना बनी रहे। मैथिली ठाकुर ने कहा कि बिहार के लोकगीतों में गांव की ही खुशबू है। जब मैं लोकगीत गाती हूं तो हजारों लोग झूमते हैं और खुशी से गीत सुनते हैं। गांव के कुम्हार, शिल्पकार, कलाकार, बढ़ई बुनकर आदि जो प्रोडक्ट बनाते हैं उनमें भी गांव की खुशबू होती है। इसलिए सभी लोग ज्यादा से ज्यादा मात्रा में खादी, हस्तकरघा और हैंडलूम का प्रयोग करें। वोकल फॉर लोकल के लिए सभी लोग पर्यत्नशील रहें तो हमारे बिहार के उत्पाद पूरी दुनिया में अपना डंका बजा सकते हैं। बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा खादी मॉल में लोकल ऑर्टिजन के समान को काफी खूबसूरती से सजाया गया है और काफी कम कीमतों पर उसे उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराया जा रहा है।
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