
पटना। नीतीश सरकार के नए शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी ने मुख्यमंत्री के सुशासन व भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके शून्य सहिष्णुता की नीति का जमकर फ़ज़ीहत करा दिया है। लोग मुख्यमंत्री के इस फैसले से अचंभित हैं कि आखिर कैसे भ्रष्टाचार के आरोपी रहे मेवालाल चौधरी को मंत्री बना दिया गया। 2005 में जब नीतीश कुमार के सुशासन की पहली धार थी तब भ्रष्टाचार का एक मामला लंबित रहने पर जीतन राम मांझी को शपथ के 7 दिनों में ही इस्तीफा देना पड़ा था। बाद में आरोप मुक्त होने पर 2008 में जीतन राम मांझी फिर से मंत्री बने थे। रेलवे टेंडर घोटाले में तेजस्वी यादव का नाम आने पर नीतीश कुमार ने राजद से गठबंधन तोड़ लिया था। अब मेवालाल के मंत्री बनने के बाद यह चर्चा भी है कि क्या नीतीश कुमार के सुशासन का धार कुंद हो गई है।
इसी बीच खबर है कि फजीहत के बाद मेवालाल को मुख्यमंत्री ने आज शाम तलब किया। मुख्यमंत्री और मेवालाल के बीच क्या बात हुई यह स्पष्ट जानकारी नहीं आई है। लेकिन यह माना जा रहा है कि अब मेवालाल की विदाई हो सकती है। उन्हें इस्तीफा देना पड़ सकता है।
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