
मुजफ्फरपुर : उद्योग विभाग द्वारा बेला अद्यौगिक परिक्षेत्र में स्थित आईडीटी सेंटर में उत्तर बिहार के 20 जिलाधिकारियों का समागम कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसका उद्घाटन बिहार के मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने किया। कार्यक्रम में सभी जिलाधिकारियों को उद्योग विभाग द्वारा संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई और बताया गया कि जिला के औद्योगिक विकास में सभी जिलाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने आमंत्रित जिलाधिकारियों को औद्योगिक प्रगति के लिए मजबूत कड़ी के रूप में काम करने का आवाहन करते हुए कहा कि सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं में प्रोटोकॉल निहित है यथा आवास योजना, सामाजिक सुरक्षा योजना, शौचालय निर्माण योजना आदि में लाभुकों का आर्थिक हित और लक्ष्य निर्धारित होते है। जबकि उद्योगों को बढ़ावा देने के संबंध में लचीलापन और आजादी है। कोई भी निवेशकर्ता हो सकते है, कितनी भी राशि निवेश किया जा सकता है। नये नये आइडिया लाये जा सकते है। नयी सेवा, नये उत्पाद और नवाचार की प्रबल संभावना उद्योग के क्षेत्र में है। उन्होनें उपस्थित जिलाधिकारियों को अपने आइडिया और प्रस्ताव भेजने हेतु निदेश दिया। उन्होनें चनपटिया (पश्चिमी चंपारण) कलस्टर का उदाहरण सबके सामने रखा। उन्होंने कहा कि निवेशकर्ता और उद्यमियों को सुविधाएं मुहैया कराने में तत्परता से सहयोग करें। कोविड के दौरान कई स्किल्ड लोग बिहार आये थे और उनमें से कई लोग अभी बिहार में ही है। स्किल मैपिंग सर्वे कराकर उनका उद्योग की दिशा में सकरात्मक सहयोग प्राप्त करें। मुख्य सचिव ने बताया कि विगत 6 माह में बैंकों का ऋण मुहैया कराने में सकारात्मक सहयोग में प्राप्त हुआ है। छोटे एवं लघु उद्यमियों को फेस्लीटेट करें। उन्होनें उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव संदीप पौण्डरीक को बधाई दी और कहा कि दक्षिण बिहार के जिलाधिकारियों के साथ भी इसी प्रकार के कार्यशाला का आयोजन जल्दी करें।
समीक्षा बैठक से पूर्व आमंत्रित सभी जिलाधिकारियों द्वारा बेला बैग कलस्टर एवं पारले जी बिस्कुट फैक्ट्री का मुआयना किया गया। जहां जिलाधिकारियों ने उद्योग लगाने और उद्योग संचालन से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त की। अपर मुख्य सचिव संदीप पौण्डरीक ने कार्यशाला का विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि बिहार में उद्योग के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं और इस दिशा में विगत साल में अच्छी प्रगति हुई है। उन्होनें कहा कि देश में 35 इथनाॅल प्लांट निर्माणाधीन हैं जिसमें 15 बिहार में है। अद्यौगिक क्षेत्र के लिए इंन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। सड़क, उर्जा, ड्रेनेज, जल निकासी, भूमि कई चुनौतियों को सहजता से सुचारू बनाया जा रहा है। पीएमइजीपी और पीएमएफएमई कार्यक्रमों में हमारी स्वीकृति बढ़ी है। जहां 3000 लोन हेतु आवेदन स्वीकृत किये जाते थे वही आज 8800 मामले स्वीकृत किया जा रहे है। पीएमएफएमई में भी जानकारी एवं जागरूकता के कारण 3000 आवेदन स्वीकृत किये गये है। स्टार्टअप टीम नीति का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। काॅलेजों में स्टार्टअप नवाचार कार्यक्रम किये जा रहे है। उन्होंने स्वीकृति की सुगम प्रक्रिया की चर्चा की तथा उद्यमी एवं निवेशकर्ता को निवेश के लिए अनुकूल वातावरण की बात कही। उन्होंने बताया कि ये न सिर्फ उद्योग बल्कि और कई विभागों की समेकित जिम्मेवारी है। जिलावार कस्मटाईज्ड उत्पाद ब्रांडिग करने की आवश्यकता पर जोर दिया और निदेश दिया। निदेशक,उद्योग विभाग सह अतिरिक्त प्रबंध निदेश बियाडा पंकज दीक्षित ने उद्योगों की स्थापना के लिए औद्योगिक क्षेत्र में जमीन आवंटन की प्रक्रिया के संबंध में विस्तार से जानकारी दी को। उन्होंने कहा कि कम दर पर काफी सुविधाओं के साथ निवेशकर्ता उद्यमी को जमीन उपलब्ध कराया जाता है। ऑनलाइन आवेदन के बाद आवेदकों के अनुरोध पर त्वरित कार्रवाई करते हुए 15 दिनों के अंदर जमीन का आवंटन कर दिया जाता है। सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से उद्यमियों को हर प्रकार का क्लीयरेंस एक ही आवेदन पर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि बिहार राज्य औद्योगिक प्रोत्साहन नीति के तहत लोन लेने पर ब्याज की राशि तथा राज्य जीएसटी की राशि सरकार वापस कर दी जाती है । साथ ही उत्पादन क्षेत्र से रोड तक माल ढुलाई भाड़ा का 30 प्रतिशत सरकार वापस कर देती है। खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय के निदेशक विवेक रंजन मैत्रेय ने बताया कि खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की मदद के लिए पीएमएफएमई स्कीम के तहत 3000 से अधिक औद्योगिक इकाइयों को मदद पहुंचाई गई। पंकज दीक्षित ने बताया कि बिहार स्टार्टअप नीति के तहत 350 से अधिक स्टार्टअप कंपनियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। तकनीकी विकास निदेशालय के निदेशक संजीव कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री उद्यमी योजना राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजना है जिसके तहत करीब 29 सौ लोगों को 2000 करोड़ से अधिक रुपए की सहायता दी जा चुकी है।
मुख्य सचिव आमिर सुबहानी, अपर मुख्य सचिव संदीप पौण्डरीक, निदेशक उद्योग पंकज दीक्षित, तकनीकी विकास के निदेशक संजीव कुमार, हथकरघा एवं रेशम निदेशक विवेक रंजन मैत्रेय, डीएम मुजफ्फरपुर प्रणव कुमार, विशेष सचिव, उद्योग दिलीप कुमार सहित अनेक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में भाग लेने वाले जिलाधिकारियों में पश्चिमी चंपारण के दिनेश कुमार राय, दरभंगा के राजीव रंजन, डीएम शिवहर रमाशंकर, डीएम अररिया श्रीमती इनायत खान, डीएम किशनगंज,श्रीकांत शास्त्री, डीएम मधुबनी अरविंद कुमार वर्मा, डीएम पूर्णिया कुंदन कुमार, डीएम सुपौल कौशल कुमार, गोपालगंज डीएम नवल किशोर चौधरी, डीएम समस्तीपुर योगेंद्र सिंह, डीएम दरभंगा राजीव रौशन , डीएम पूर्वी चंपारण सौरव जोरवाल, डीएम वैशाली यशपाल मीणा, डीएम खगड़िया अमित कुमार पांडेय, डीएम सीतामढ़ी मनेश कुमार मीणा, डीएम सारण अमन समीर, डीएम कटिहार रवि प्रकाश, डीएम मधेपुरा विजय प्रकाश मीणा, डीएम सहरसा वैभव चौधरी, डीडीसी सिवान भूपेंद्र सिंह आदि शामिल रहे।
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