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मध्य प्रदेश पुलिस के शार्प शूटर मनीष मिश्रा की दर्दनाक कहानी

मध्य प्रदेश पुलिस का एसआई मनीष मिश्रा की कहानी अजीबो गरीब सोशल मीडिया पर हो रहा वायरल

NEWSNLIVE DESK: भिखारी की वेशभूषा में कचरे में अपने लिए खाना तलाश रहे मध्य प्रदेश पुलिस के शार्प शूटर एवं सब इंस्पेक्टर मनीष मिश्रा की जिंदगी की कहानी के कुछ पन्ने खुलना शुरू हो गए हैं लेकिन इस स्थिति तक पहुंचने के कारणों का खुलासा होना अभी भी शेष है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि ठीक प्रकार से इलाज हुआ तो 3 महीने में सब इंस्पेक्टर मनीष मिश्रा पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएंगे।
कहां, किसे और कैसे मिले सब इंस्पेक्टर मनीष मिश्रा

मध्यप्रदेश विधानसभा उपचुनाव के दौरान डीएसपी रत्नेश सिंह तोमर और सीएसपी विजय सिंह भदौरिया जब ड्यूटी पर थे उस समय उन्होंने एक व्यक्ति को ठंड से ठिठुरते हुए कचरे में अपने लिए खाना तलाशते हुए देखा।
दोनों अधिकारियों ने उस आदमी को अपने जूते और जैकेट उतार कर दे दिए। जब वह पलट कर जाने लगे तो उस व्यक्ति ने दोनों अधिकारियों को उनके नाम से बुलाया फिर अपना परिचय दिया। तब जाकर खुलासा हुआ कि कचरे के ढेर पर बैठा है पागल जैसा दिखने वाला व्यक्ति 1999 बैच का सब इंस्पेक्टर मनीष मिश्रा है। (यहां गौर करने वाली बात यह है कि मनीष मिश्रा ने अपने दोनों साथियों को पहचाना और अपना परिचय भी दिया यानी उनकी याददाश्त ठीक है और वह पागल नहीं है।)

पत्नी जज बन गई, उसने तलाक ले लिया इसलिए मनीष की यह हालत हुई: भाई उमेश मिश्रा ने कहा

सब इंस्पेक्टर मनीष मिश्रा के बड़े भाई जो इन दिनों गुना जिले में थाना प्रभारी के पद पर पदस्थ हैं, का कहना है कि मनीष ने एक काबिल पुलिस अफसर के रूप में शुरुआत की थी जो शुरू से ही चर्चाओं में रहा है, लेकिन आज वह जिस हालात में है उसके पीछे उन्होंने संभावना जाहिर की हैं कि पत्नी के साथ वैचारिक मतभेद के कारण ऐसा हुआ होगा। उमेश मिश्रा ने बताया कि शादी के बाद मनीष मिश्रा की पत्नी ने न्यायिक सेवा के लिए प्रतियोगी परीक्षा दी और उनका सिलेक्शन हुआ। इसके बाद दोनों के बीच तनाव बढ़ने लगा और तलाक हो गया। उमेश मिश्रा का कहना है कि जब भी उनकी पत्नी का जिक्र होता है तो मनीष मिश्रा अपना होश खो बैठते हैं।

मनीष का काफी इलाज करवाया, पिछले साल दिवाली के बाद गायब हो गया था

भाई उमेश मिश्रा का कहना हैं कि वह जहां-जहां नौकरी पर पदस्थ रहे हैं उन्होंने मनीष का लगातार इलाज करवाया। वह ग्वालियर में रहे हो या वर्तमान में पदस्थ गुना जिले में सभी जगह पर मनीष को अपने साथ रखा। यहां तक की बीते वर्ष 2019 की दीपावली भी मनीष ने उनके घर पर उनके साथ ही मनाई थी। इसके बाद मनीष अचानक से गायब हो गया, उसे खोजने के काफी प्रयास किए मालूम भी चला कि वह ग्वालियर में नजर आया है लेकिन चुनाव ड्यूटी के चलते वह ग्वालियर उसे खोजने नहीं आ सके। उमेश का कहना है कि वह जल्द अपने भाई मनीष से मिलने ग्वालियर आने वाले है।

डॉक्टरों का दावा मात्र 3 महीने में पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगे एसआई मनीष मिश्रा

बड़े भाई उमेश मिश्रा का कहना है कि उन्होंने मनीष मिश्रा का काफी इलाज कराया लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यदि सही प्रकार से ट्रीटमेंट किया गया तो मात्र 3 महीने में मनीष मिश्रा पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएंगे। डॉ इस बात का ध्यान रख रहे हैं कि इन 3 महीनों में मनीष मिश्रा के सामने उनकी जिंदगी से जुड़ा कोई सवाल ना किया जाए।

दोस्तों से वीडियो कॉल पर बात करते हैं, पत्नी का नाम सुनते ही संतुलन खो बैठते हैं

मनीष मिश्रा को इलाज के लिए स्वर्ग सदन आश्रम रखा गया है। आश्रम के संचालक विकास गोस्वामी का कहना हैं की जब भी मनीष से उसके परिवार उसकी पत्नी के बारे में बात की जाती है तो वह अपना मानसिक संतुलन अचानक से खो बैठते है और काफी आक्रमक हो जाते है। वह सामान्य तौर पर अपने बैच में पुलिस अधिकारियों से फोन पर वीडियो कॉल के जरिए गुफ्तगू भी करते है।

ग्वालियर में कुछ लोग मनीष मिश्रा को सट्टे वाले बाबा के नाम से जानते हैं

आश्रम संचालक विकास गोस्वामी ने मनीष मिश्रा के 8 से 10 महीने पुराने जीवन के बारे में भी पता किया है। इस बीच मनीष कुछ विशेष वर्ग के लोगों के बीच में सट्टे वाले बाबा के रूप में भी पहचाना जाने लगे थे। कुछ असामाजिक लोग उनसे सट्टे की पर्ची का नंबर जानने पहुंचने लगे थे। एक बार उनके बताए सट्टे नंबर सही निकल गया था और यही वजह रही कि आज भी आश्रम पर ऐसे तमाम असामाजिक लोग मनीष के लिए खाना उसके लिए कपड़े और उसकी मदद करने पहुंचते हैं और कोशिश करते हैं कि उससे सट्टे के नंबर जान सके। इन बिगड़ती परिस्थितियों को देखते हुए आश्रम संचालक विकास ने डीएसपी रत्नेश तोमर से इसकी शिकायत की जिसके बाद उन सभी असामाजिक तत्वों को समझाइश देकर आश्रम में ना आने की हिदायत दी गई है।

बहन चीन दूतावास में लेकिन मिलने आएंगी या नहीं पता नहीं

मनीष मिश्रा के साथी रत्नेश तोमर उनके बैच के पुलिस अधिकारी जो कि वर्तमान में ग्वालियर में बतौर डीएसपी पदस्थ है। उन्होंने बताया कि उनकी मनीष के भाई उमेश मिश्रा और उनकी बहन मंजुला मिश्रा जो कि चीन दूतावास में पदस्थ है, उनसे बात हुई है। बहन को मनीष की वर्तमान हालात को उनसे अवगत कराया है। फिलहाल बड़े भाई उमेश मिश्रा मनीष से मिलने ग्वालियर आने वाले है, लेकिन उनकी बहन मंजुला मिश्रा कब तक उनसे मिलने यहां पहुंचेंगे यह उन्होंने स्पष्ट नहीं किया है।

डॉ सुरेंद्र

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