
कलम दवात के साथ होती है चित्रगुप्त महाराज की पूजा
रांची संवाददाता: भारतवर्ष में वैदिक काल से ही चित्रगुप्त जी की पूजा-अर्चना का भाव देखने को मिलता है, पर भारतीय इतिहास के स्वर्णयुग अर्थात् गुप्तकाल से चित्रगुप्त की आराधना व्यापक रूप में होने लगी। उत्तर, दक्षिण, पूरब व पश्चिम भारत में विराजमान चार धामों के समान श्री चित्रगुप्त जी के चार धामों का भी उल्लेख आता है, जिनमें उज्जैन, कांचीपुरम, अयोध्या और पटना का नाम शामिल है। इन स्थानों पर चित्रगुप्त के प्राचीन आराधना स्थल विराजमान हैं। इसके अलावा खजुराहो, प्रयागराज, हैदराबाद, वाराणसी, भोपाल, रीवा, भरमौर, नई दिल्ली, मैहर, गुना, गया, बक्सर, भोपाल, कानपुर, जबलपुर, ग्वालियर, शिवपुरी, जगन्नाथपुरी, गोरखपुर आदि नगरों में भी चित्रगुप्त मंदिर स्थापित हं। कहीं इनका स्वतंत्र देवालय है, तो कहीं देवी मां, शिवशंकर या सूर्य नारायण के मंदिर में संयुक्त रूप से विराजमान हैं। चित्रगुप्त मुक्ति, भुक्ति, मोक्ष व यश के चतुर्मणि हैं, जिनकी आराधना कभी निष्फल नहीं जाती।
बिहार और झारखंड में यह पर्व काफी महत्वपूर्ण है पटना रांची जमशेदपुर बोकारो भागलपुर आदि शहरों में बहुत ही धूमधाम के साथ आज चित्रगुप्त पूजा का आयोजन हुआ है। कायस्थ्थ समाज के प्रत्येक घरों में आज कलम दवात के साथ चित्रगुप्त भगवान की पूजा की गई ।
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