
पटना। तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी को उपमुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने वैश्य और महिला कार्ड खेला है. दोनों के जरिए वैश्य और महिला समाज को साधने की कोशिश की गई है. बता दें कि एनडीए को सत्ता में लाने में महिला वोटरों का बड़ा योगदान रहा है.
दूसरी ओर वैश्य भाजपा के आधार वोटर रहे हैं. बिहार में सुशील मोदी वैश्य समाज के निर्विवाद नेता माने जाते रहे हैं. ऐसे में पार्टी के शीर्ष नेताओं ने जब उन्हें उपमुख्यमंत्री पद से हटाने का फैसला लिया तो यह ध्यान रखा कि उनकी जगह उनकी बिरादरी का और उनकी पसंद का कोई नेता इस पद पर बैठाया जाए. जानकार बता रहे हैं कि बड़े नेताओं ने सुशील मोदी से ही अपने उत्तराधिकारी का नाम सुझाने को कहा. इसके बाद मोदी ने ही तारकिशोर प्रसाद का नाम आगे किया. वहीं दूसरी ओर कला और संस्कृति मंत्री रह चुकी रेणु देवी के जरिए आधी आबादी को हिस्सेदारी देने की कोशिश की गई है. उनके जरिए नोनिया जाति के वोटरों को भी साधने की कोशिश की गई है.
अमित शाह और सुशील मोदी के संपर्क का दोनों को मिला लाभ
तारकिशोर प्रसाद को सुशील मोदी के नजदीकी होने का लाभ मिला है वहीं दूसरी ओर रेणु देवी को गृह मंत्री अमित शाह का सानिध्य का फायदा मिला है. रेणु अमित शाह के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते उनकी टीम में उपाध्यक्ष के रूप में काम कर चुकी हैं. उनकी आरएसएस की पृष्ठभूमि भी उपमुख्यमंत्री बनाने में काम आई है.
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