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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में छठ महापर्व की शुभकामना दी

Bharat varta Desk

आज चार दिवसीय छठ महापर्व का दूसरा दिन खरना है. शाम के प्रसाद की तैयारी की जा रही है. कल पहला अर्घ्य है और परसों दूसरा। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 127वें एपिसोड की शुरुआत छठ की शुभकामनाओं के साथ की. पीएम मोदी ने लोगों से कहा कि वे अपने आसपास छठ पूजा को देखें, काफी सुखद अनुभव होगा. छठ का महापर्व संस्कृति, प्रकृति और समाज के बीच की गहरी एकता का प्रतिबिंब है. छठ के घाटों पर समाज का हर वर्ग एक साथ खड़ा होता है. ये दृश्य भारत की सामाजिक एकता का सबसे सुंदर उदाहरण है.

प्लास्टिक लाओ खाना खाओ

पीएम मोदी ने कहा कि छतीसगढ़ के अम्बिकापुर में Garbage Cafe चलाए जा रहे हैं. ये ऐसे cafe हैं, जहां प्लास्टिक कचरा लेकर जाने पर भरपेट खाना खिलाया जाता है. अगर कोई एक किलो प्लास्टिक लेकर जाता है तो उसे रात या दिन का खाना दिया जाता है. यदि कोई आधा किलो प्लास्टिक लेकर जाता है तो उसे नाश्ता दिया जाता है. यह कैफे अंबिकापुर म्युनिसिपल कारपोरेशन चलाता है.

PM मोदी के ‘मन की बात’ की बड़ी बातें

  • गुजरात के वन विभाग ने मैनग्रोव (Mangrove) के महत्व को समझते हुए खास मुहिम चलाई हुई है. पांच साल पहले वन विभाग की टीमों ने अहमदाबाद के नजदीक धोलेरा में Mangrove लगाने का काम शुरू किया था, और आज धोलेरा तट पर साढ़े तीन हजार हेक्टेयर में Mangrove फैल चुके हैं.
  • पीएम मोदी ने कहा कि करीब पांच वर्ष पहले मैंने इस कार्यक्रम में भारतीय नस्ल के ‘श्वान’ यानी dogs की चर्चा की थी. मैंने देशवासियों के साथ ही अपने सुरक्षा बलों से आग्रह किया था कि वे भारतीय नस्ल के डॉग्‍स को अपनाएं, क्योंकि वो हमारे परिवेश और परिस्थितियों के अनुरूप ज्यादा आसानी से ढल जाते हैं. BSF और CRPF ने अपने दस्तों में भारतीय नस्ल के डॉग्‍स की संख्या बढ़ाई है.
  • सरदार पटेल आधुनिक काल में राष्ट्र की सबसे महान विभूतियों में से एक रहे हैं. उनके विराट व्यक्तित्व में अनेक गुण एक साथ समाहित थे.  मेरा आप सबसे आग्रह है, 31 अक्टूबर को सरदार साहब की जयंती पर देशभर में होने वाली Run For Unity में आप भी जरूर शामिल हों.
  • ‘वन्देमातरम्’ इस एक शब्द में कितने ही भाव हैं, कितनी ऊर्जाएं हैं. सहज भाव में ये हमें माँ भारती के वात्सल्य का अनुभव कराता है. यही हमें माँ भारती की संतानों के रूप में अपने दायित्वों का बोध कराता है. अगर कठिनाई का समय होता है तो ‘वन्देमातरम्’ का उद्घोष 140 करोड़ भारतीयों को एकता की ऊर्जा से भर देता है. 7 नवंबर को हम ‘वन्देमातरम्’ के 150वें वर्ष के उत्सव में प्रवेश करने वाले हैं. 150 वर्ष पूर्व ‘वन्देमातरम्’ की रचना हुई थी और 1896 में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने पहली बार इसे गाया था.
Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

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