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प्रधानमंत्री के करीबी सुनील ओझा यूपी से बिहार ट्रांसफर, भाजपा के सह प्रभारी बने

Bharat varta desk: बिहार भाजपा लोकसभा चुनाव की तैयारी को बड़े ही रणनीतिक ढंग से अंजाम दे रही है। विपक्ष के नेता के तौर पर विजय सिन्हा, उसके बाद पिछले दिनों कुशवाहा समाज से आने वाले सम्राट चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। अब सामाजिक समीकरणों को साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी और उत्तर प्रदेश भाजपा के सह प्रभारी सुनील ओझा को बिहार भाजपा का सह प्रभारी नियुक्त किया गया है।

यूपी से बिहार भेजे गए

मूल रूप से गुजरात के रहने वाले सुनील ओझा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी रहे हैं और वाराणसी में उनके संसदीय क्षेत्र की भी जिम्मेदारी संभालते हैं। ओझा ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत गुजरात के भावनगर से की थी। वह दो बार भाजपा के टिकट पर भावनगर से विधायक भी चुने गए पर जब 2007 में भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो निर्दलीय चुनाव लड़े और हार गए। इसके बाद से उनके और मोदी के बीच दूरियां बढ़ गईं।
जमकर बता रहे हैं कि उस वक्त गुजरात के सीएम के तौर पर नरेंद्र मोदी ने अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया था और इस अभियान को लेकर ही सुनील ओझा मोदी से नाराज हो गए थे। भाजपा छोड़ने के बाद सुनील ओझा ने महागुजरात जनता पार्टी नाम से अलग पार्टी भी बना ली थी, हालांकि बाद में 2011 में वह एक बार फिर मोदी के करीब आ गए। उन्हें गुजरात भाजपा का प्रवक्ता बना दिया गया। जब 2014 में पीएम नरेंद्र मोदी ने वाराणसी लोकसभा से चुनाव लड़ने का फैसला किया तो सुनील ओझा, अरुण सिंह और सुनील देवधर को चुनाव की जिम्मेदारी संभालने के लिए भेजा गया। चुनाव के बाद अरुण सिंह और सुनील देवधर को दूसरी जिम्मेदारी दे दी गई मगर सुनील ओझा बनारस में ही बने रहें।
जब अमित शाह को यूपी भाजपा का प्रभारी बनाया गया तो सुनील ओझा को सहप्रभारी बनाया गया। ओझा तब से काशी क्षेत्र की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। 2019 में उन्हें गोरक्ष प्रांत की भी जिम्मेदारी दी गई थी।

सुनील ओझा का आश्रम चर्चा में

मिर्जापुर में गंगा नदी के किनारे गड़ौली गांव में सुनील ओझा इन दिनों गड़ौली धाम आश्रम भी बनवा रहे हैं। आश्रम को चलाने वाले ओएस बालमुकुंद फाउंडेशन के अध्यक्ष सुनील ओझा हैं। फाउंडेशन पहली बार कोविड की दूसरी लहर के वक्त तब चर्चा में आया था, जब उसके कार्यकर्ताओं ने लोगों को घर-घर खाना पहुंचाना शुरू किया था। इसके बाद सुनील ओझा ने मिर्जापुर में गंगा नदी के किनारे 20 बीघा जमीन खरीदी और उस पर आश्रम का निर्माण शुरू किया। आश्रम में बालेश्वर महादेव का भव्य मंदिर है तो यहां गौरी शंकर की 108 फुट की प्रतिमा लगाने की भी तैयारी की जा रही है। जानकारों के अनुसार भाजपा से जुड़े नेता और मंत्रियों का इस आश्रम में तांता लगा रहता था। तब यह चर्चा होती थी कि भाजपा के लोग पद पाने के लिए यहां परिक्रमा करते हैं मगर जानकार यह दावा करते हैं कि बाद में यह बात जब दिल्ली तक पहुंची तो आलाकमान ने इसको गंभीरता से लिया फिर भाजपा नेताओं का यहां आने का सिलसिला रुक गया।

Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

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