
भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि को मध्याह्र के समय विघ्न विनायक भगवान श्रीगणेश जी का जन्म हुआ था। अतः यह तिथि मध्याह्रव्यापिनी लेनी चाहिए। गणेश जी हमारे प्रथम पूज्य देवता हैं। सनातन धर्मानुयायी स्मार्त़ों के पंच देवताओं में गणेश जी प्रमुख हैं। हम हिंदुओं के घर में चाहे जैसी पूजा या कोई भी वैदिक कर्मानुष्ठान हो सर्वप्रथम श्री गणेश जी का आवाहन और पूजन किया जाता है। शुभ कार्यों में गणेश जी की स्तुति का अत्यंत महत्व माना गया है। गणेश जी विघ्नों को दूर करने वाले देवता हैं। इनका मुख हाथी का है उदर लंबा तथाशेष शरीर मनुष्य के समान है मोदक इन्हें विशेष प्रिय हैं। इस वर्ष गणेश चतुर्थी का पर्व शुक्रवार को मनाया जा रहा।
इस वर्ष गणेश चतुर्थी के दिन विशेष संयोग बन रहा है।
स्थिर लग्न अभिजीत मुहूर्त और शुभ की चौघड़िया का विशेष संयोग बन रहा है। इस संयोग में भगवान गणेश जी की स्थापना पूजन की जाए तो सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। गणेश जी के आवाहन पुजन के बाद *गणेश अथर्वशीर्षम तथा संकटनाशन गणेश स्तोत्र ऋणहर्ता श्री गणेश स्तोत्र का यथा संख्या पाठ एवं ॐ गं गणपतये नमः का मंत्र यथा संख्या जाप करना चाहिए। गणेश जी को 21 दूर्वा दल चढ़ाना चाहिए। 21 लड्डुओं का भोग लगाना चाहिए। 1008दूर्वा का माला एक पानपता समर्पित करने से अभीष्ट सिद्धि होती है। श्री गणेश सहस्त्र नाम पाठ तथा 1008 मोदक लड्डू अर्पित करने से मनोकामना पूर्ण होता है।घर मे कुवेर का वास तथा ऋद्धि सिद्धि का वास होता है। सभी प्रकार से सुख शांति की सम्प्राप्ति होती है।
आचार्य मंकेश्वर नाथ तिवारी
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