
NewsNLive Desk: आज से देश में महापर्व छठ की शुरूआत हो गई है. छठ पर्व पर सूर्य देव की पूजा का बहुत महत्व होता है, सूर्य को इस दिन शाम को और दूसरे दिन सुबह अर्घ्य दिया जाता है. छठ का पहला दिन नहाय खाए से शुरू होता है. उत्तर प्रदेश और खासकर बिहार में मनाया जाने वाला ये पर्व अपने आप में काफी खास है. इसे पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है. छठ पूजा चार दिन तक चलती है. सूर्य देव की आराधना और संतान के सुखी जीवन की कामना के लिए समर्पित छठ पूजा हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को होती है. इस वर्ष छठ पूजा 20 नवंबर यानी शुक्रवार को है.
राजा प्रियंवद की कोई संतान नहीं थी
छठ पर्व कैसे शुरू हुआ इसके पीछे कई ऐतिहासिक कहानियां प्रचलित हैं. पुराण में छठ पूजा के पीछे की कहानी राजा प्रियंवद को लेकर है. कहते हैं राजा प्रियंवद की कोई संतान नहीं थी. तब महर्षि कश्यप ने पुत्र की प्राप्ति के लिए यज्ञ कराकर प्रियंवद की पत्नी मालिनी को आहुति के लिए बनाई गई खीर दी. इससे उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई लेकिन वह पुत्र मरा हुआ पैदा हुआ. प्रियंवद पुत्र को लेकर श्मशान गए और पुत्र वियोग में प्राण त्यागने लगे. उसी वक्त भगवान की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुईं और उन्होंने राजा से कहा कि क्योंकि वह सृष्टि की मूल प्रवृति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हैं, इसी कारण वो षष्ठी कहलातीं हैं. उन्होंने राजा को उनकी पूजा करने और दूसरों को पूजा के लिए प्रेरित करने को कहा.
सीता जी ने 6 दिनों तक सूर्यदेव की उपासना की
राजा प्रियंवद ने पुत्र इच्छा के कारण देवी षष्ठी का व्रत किया और उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई. कहते हैं ये पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को हुई थी और तभी से छठ पूजा होती है. इस कथा के अलावा एक कथा राम-सीता जी से भी जुड़ी हुई है. पौराणिक कथाओं के मुताबिक जब राम और सीता 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे तो रावण वध के पाप से मुक्त होने के लिए उन्होंने ऋषि-मुनियों के आदेश पर राजसूर्य यज्ञ करने का फैसला किया था. पूजा के लिए उन्होंने मुग्दल ऋषि को आमंत्रित किया. मुग्दल ऋषि ने मां सीता पर गंगा जल छिड़क कर उन्हें पवित्र किया और कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्यदेव की उपासना करने का आदेश दिया. उस समय सीता जी ने मुग्दल ऋषि के आश्रम में रहकर 6 दिनों तक भगवान सूर्यदेव की पूजा की थी.
द्रौपदी ने भी छठ व्रत रखा था
एक और मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी. इसकी शुरुआत सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने सूर्य की पूजा करके की थी. कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे और वह रोज घंटों कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे. सूर्य की कृपा से ही वह महान योद्धा बने. आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही परंपरा प्रचलित है. छठ पर्व के बारे में एक कथा और भी है. इस कथा के मुताबिक जब पांडव अपना सारा राजपाठ जुए में हार गए तब द्रौपदी ने छठ व्रत रखा था. इस व्रत से उनकी मनोकामना पूरी हुई थी और पांडवों को अपना राजपाठ वापस मिल गया था. लोक परंपरा के मुताबिक सूर्य देव और छठी मईया का संबंध भाई-बहन का है. इसलिए छठ के मौके पर सूर्य की आराधना फलदायी मानी गई है.
Bharat varta Desk ममता पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हमला… Read More
Bharat varta Desk बिहार सरकार ने चर्चित रिशु श्री मनी लॉन्ड्रिंग और टेंडर हेराफेरी मामले… Read More
Bharat varta Desk सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी (NEET-UG) में हुई गड़बड़ी को लेकर एनटीए (NTA)… Read More
Bharat varta Desk कर्नाटक में जहां कांग्रेस ने अपने मुख्यमंत्री बदल दिए हैं वहीं भाजपा… Read More
Bharat varta desk . कर्नाटक CM सिद्दारमैया ने इस्तीफे का ऐलान किया है. ब्रेकफास्ट मीटिंग… Read More
Bharat varta desk केरल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. मुख्यमंत्री पद छोड़ने… Read More