
Bharat varta desk:
देश की सर्वोच्च अदालत के चीफ जस्टिस एनवी रमना ने महिला वकीलों से आह्वान किया कि वे न्यायपालिका में 50 फीसदी आरक्षण की मांग उठाएं। उन्हें उनका पूरा समर्थन है।
सुप्रीम कोर्ट में महिला वकीलों द्वारा नौ नवनियुक्त न्यायाधीशों
के सम्मान समारोह में चीफ जस्टिस ने कहा, ‘मैं नहीं चाहता कि आप रोएं, लेकिन आप गुस्से से चिल्लाएं और मांग करें कि हम 50 फीसदी आरक्षण चाहते हैं।’चीफ जस्टिस ने कहा किया हजारों सालों से महिलाओं के दमन का मामला है। महिलाएं आरक्षण की हकदार हैं।
चीफ जस्टिस ने कहा, ‘यह अधिकार का मामला है, दया का नहीं। मैं देश के लॉ स्कूलों में महिलाओं के लिए निश्चित मात्रा में आरक्षण की मांग का भी समर्थन करता हूं, ताकि वे न्यायपालिका में आ सकें’।
कार्ल मार्क्स का नारा
चीफ जस्टिस ने कार्ल मार्क्स के नारे ‘दुनिया के मजदूरों एक हो जाओ, तुम्हारे पास खोने के लिए अपनी जंजीरों के अलावा कुछ नहीं है,’ की तर्ज पर कहा कि ‘दुनिया की महिलाएं एकजुट हो जाओ, तुम्हारे पास खोने के लिए अपनी जंजीरों के अलावा कुछ नहीं है’।
सीजेआई ने कहा कि पूरे देश व अधीनस्थ न्यायालयों में 30 फीसदी से भी कम महिलाएं हैं। हाईकोर्टों में महिला जजों की संख्या 11.5 फीसदी हैै और सुप्रीम कोर्ट के 33 जजों में चार महिलाएं हैं, यह करीब 11 या 2 फीसदी होता है।
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