
पटना : बिहार राजस्व सेवा संयुक्त महासंघ के अंतर्गत बिरसा एवं बिरसा यूनाइटेड संयुक्त संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों की गुरुवार को गांधी मैदान में विशेष बैठक हुई। बैठक में संघर्ष की नई रणनीति पर चर्चा की गई और सारण में आयोजित भूमि सुधार जनकल्याण संवाद में उपमुख्यमंत्री द्वारा दिए गए ‘इलाज’ संबंधी बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई।
संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने स्पष्ट कहा कि सामूहिक अवकाश सहित सभी समस्याओं का समाधान केवल संवाद और पारस्परिक सम्मान से ही संभव है। मोर्चा ने उपमुख्यमंत्री द्वारा “होम्योपैथिक, एलोपैथिक और आयुर्वेदिक इलाज” जैसे शब्दों के प्रयोग को अपमानजनक बताते हुए इसकी घोर निंदा की। साथ ही 1000 से अधिक राजपत्रित अधिकारियों को “बीमार” बताने और “इलाज” करने जैसी भाषा को धमकीपूर्ण करार दिया।
मोर्चा ने उपमुख्यमंत्री के “कुंडली खंगालने”, “अराजकता का माहौल बनाने” और “अपराध को हवा देने” जैसे आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यह अधिकारियों के खिलाफ जनता को भड़काने और प्रतिशोधात्मक कार्रवाई का प्रयास है। संगठन ने 5 फरवरी 2026 को उपमुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में दिए गए मौखिक आश्वासनों को लागू करने की मांग दोहराई, जिसके लिए 12 फरवरी की तिथि निर्धारित की गई थी।
संघ ने बंदोपाध्याय कमेटी की अनुशंसाओं के आलोक में गठित बिहार राजस्व सेवा नियमावली 2010 की मूल भावना का सम्मान करने और इससे छेड़छाड़ करने वाले अधिकारियों के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच की मांग की। साथ ही पटना हाई कोर्ट के आदेशों के अनुपालन पर भी जोर दिया गया।
भूमि सर्वेक्षण की धीमी प्रगति पर चिंता व्यक्त करते हुए मोर्चा ने कहा कि बिहार में भूमि विवादों के स्थायी समाधान के लिए सर्वेक्षण कार्य का शीघ्र पूर्ण होना अत्यंत आवश्यक है। बार-बार समयसीमा बढ़ाए जाने और लक्ष्यों के अधूरे रहने के पीछे जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी की गई।
सारण जिले का उदाहरण देते हुए मोर्चा ने आरोप लगाया कि योग्य बिहार राजस्व सेवा अधिकारी उपलब्ध होने के बावजूद जिला भू-अर्जन पदाधिकारी का पद अन्य सेवा के अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार में दिया गया है। इसके कारण गंगा पर जेपी सेतु के समानांतर बन रहे पुल और मांझी बाइपास जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने दोहराया कि मांगें पूरी होने तक सभी अधिकारी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। पटना सदर, दानापुर, फुलवारी और फतुहा जैसे क्षेत्रों में पदस्थापित अधिकारियों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उन्होंने समझौते के बजाय सम्मान की लड़ाई का रास्ता चुना है।
मोर्चा ने कहा कि सेवा संवर्ग के हितों और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए यह कदम अंतिम विकल्प के रूप में उठाया गया है।
Bharat Varta Desk : अक्सर हम बिहार पुलिस पर सवाल उठाते हैं, उसकी कार्यशैली की… Read More
Bharat varta Desk प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए अपर और… Read More
Bharat varta Desk प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने… Read More
पटना, भारत वार्ता संवाददाता : बिहार में अंचलाधिकारी (CO) और राजस्व कर्मचारियों (RO) की हड़ताल… Read More
Bharat varta Desk बिहार कैडर के चार आईपीएस अधिकारियों को अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) से… Read More
पटना : जानकी देवी महिला महाविद्यालय, पटना में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के सात दिवसीय… Read More