आज प्रकृति विहंस रही है
गाती है मुसकाती है,
खिल-खिल हंसती इतराती
निज सुंदर रूप दिखाती है।
कोरोना के युग में देखो
गतिमय दुनियां जब ठहरी,
सकल प्रदूषण बंद हुआ जब
फैली प्रकृति-प्यार लहरी।।
इसका कारण जो कुछ भी हो
सच प्रकृति-पुरुष का अनुशासन,
प्रकृति तिरस्कृत हुई,मनुज से
फिर दिखलायी अपना शासन
दुनियां के सब देश-देश के
जन पर राजा करते शासन
किंतु,प्रकृति का कहना है कि
सकल विश्व पर मेरा शासन
देख मनुजता के रखवालो
प्रकृति की कैसी माया है,
अब तो भय कर चेतो मानव
ये प्रलय काल की छाया है।
शिक्षा दी है उग्रभाव में
सत्ता शक्ति पर न इतरो
भौतिकता औ अर्थ शिखर पर
न दोड़ो,भागों,अब ढहरो।।
दुनियां की सरकारों के
कानून नियम नर का रक्षण,
जड़ चेतन के सब जीवों का
करती है प्रकृति संरक्षण।
मानो संदेश प्रकृति का यह
सबका संरक्षण पोषण हो,
हर चीज हमारे आंचल में
सीमित लो,ना कि शोषण हो।।
प्रकृति के स्वामी परम पुरुष की,सब पर शाश्वत सत्रा है।
अंहकार में भूलो मत,भज नाम हरि अलबत्ता है
परिकर परिचर बहुत प्रकृति के
संग आज मधुर मुस्काते हैं,
हर्षित सबको देख रसिक
कुछ गीतों में कह जाते हैं.

परमहंस स्वामी आगामनंद जी
महाराज स्वामी आगमानंद परिवार एवं श्रीशिवशक्तियोगपीठ नवगछिया, भागलपुर,बिहार
Bharat varta Desk बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हुए चुनाव में एनडीए… Read More
Bharat varta Desk विधानसभा चुनाव की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर बड़ा प्रशासनिक… Read More
Bharat varta Desk पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के तारीखों… Read More
Bharat varta Desk ओम बिरला को स्पीकर पद से हटाने का प्रस्ताव बुधवार को लोकसभा… Read More
Bharat varta Desk अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए टी-20 वर्ल्ड कप के… Read More
Bharat varta Desk आज बिहार की राजधानी पटना में नए सियासी युग की शुरुआत हो… Read More