
भागलपुर : सामुदायिक रेडियो समुदायों को सशक्त बनाने का सबसे सशक्त माध्यम है। यही कारण है कि सरकार सामुदायिक रेडियो की संख्या बढ़ाने पर बल देते रही है। आपदाओं के वक्त सही व तथ्यात्मक सूचनाओं को तेजी से पहुंचाने में सामुदायिक रेडियो की भूमिका महत्वपूर्ण है। कोरोना महामारी के संक्रमण से बचाने व अफवाहों से सचेत रहने के लिए देशभर के सामुदायिक रेडियो महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के सामुदायिक रेडियो स्टेशन एफएम ग्रीन कोविड सहज ज्ञान की श्रृंखला चला रहा है।
कोरोना से संबंधित दी जा रही वैज्ञानिक जानकारी : कुलपति
बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति डॉ आर के सोहाने ने बताया कि कोरोना से संबंधित बहुत सारे नए शब्द वैरिएंट, म्यूटेशन, आइसोलेशन, इम्युनिटी इत्यादि सुनने को मिल रहे हैं। दूरदराज गांव के लोग और किसान इन शब्दों के साथ अभी सहज नहीं हैं। सामुदायिक रेडियो स्टेशन एफएम ग्रीन के माध्यम से हमारे विशेषज्ञ बहुत ही सरल तरीके से वैज्ञानिक जानकारी लोगों को बता रहे हैं और लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के सामुदायिक रेडियो स्टेशन एफएम ग्रीन कोविड सहज ज्ञान की श्रृंखला का पहला भाग का प्रसारण शुक्रवार को किया गया। इसमें बिहार कृषि विश्वविद्यालय के मॉलिक्यूलर वैज्ञानिक डॉ तुषार रंजन ने श्रोताओं को विस्तृत जानकारी दी। डॉ तुषार ने बताया कि कोरोना वायरस के प्रसार को रोकना है तो लोगों को वायरस की प्रकृति और व्यवहार को समझना होगा।
कार्यक्रम के संचालक और आएफएम ग्रीन के प्रभारी ईश्वर चंद्र ने बताया कि आमलोगों को जागरूक करने के लिए सहज ज्ञान कार्यक्रम का प्रसारण किया जा रहा है।
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