केंद्रीय विश्वविद्यालयों में पढ़ाने के लिए PhD नहीं होगी अनिवार्य,
Bharat varta desk:

देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में पढ़ाने के लिए अब पीएचडी की डिग्री अनिवार्य नहीं होगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने पीएचडी की अनिवार्यता को खत्म करने का फैसला लिया है। यह व्यवस्था की जा रही है कि संबंधित विषय के विशेषज्ञ विश्वविद्यालय में पढ़ा सकें ताकि छात्रों को संबंधित विषय का अधिकतम फायदा मिल सके।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक यूजीसी कई ऐसे नए पदों को सृजित करने जा रहा है जिस पर ऐसे विशेषज्ञों की प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति की जा सके। ये पद प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस व एसोसिएट प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के नाम से जाने जाएंगे।
टाइम्स ऑफ इंडिया को यूजीसी के चेयरमैन एम जगदेश कुमार ने बताया है कि, ‘कई विशेषज्ञ हैं जो पढ़ाना चाहते हैं। कोई ऐसा व्यक्ति हो सकता है जिसने बड़ी परियोजनाओं को लागू किया हो और जिसके पास जमीनी स्तर का काम करने का अनुभव हो, ये कोई कोई महान नर्तक या संगीतकार भी हो सकता है।’

Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

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