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Bharat varta Desk
विश्व हिंदी परिषद के तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन का शुभारंभ परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार के ध्येय गीत से हुआ। । इस ध्येयगीत की भावपूर्ण एवं सजीव प्रस्तुति गायत्री जी द्वारा दी गई। “जयति जय जय – विश्व भाषा हिंदी! हिंदी है हम – विश्व भाषा हमारी!” जैसे प्रेरक उद्गारों से सभागार हिंदीमय वातावरण में सराबोर हो उठा। ध्येयगीत में भारत की भाषायी विविधता, सांस्कृतिक एकता, मानवता, शांति, भाईचारे तथा विश्व गुरु भारत के संकल्प को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने हिंदी को राष्ट्रनिर्माण की आधारशिला बताते हुए इसके वैश्विक प्रसार के लिए निरंतर और संगठित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील अम्बेकर ने अपने वक्तव्य में कहा कि हिंदी समाज को जोड़ने वाली सांस्कृतिक शक्ति है, जो भारत की चेतना, परंपरा और मूल्यों को एक सूत्र में पिरोती है। उन्होंने हिंदी को जन-जन की भाषा बताते हुए सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता एवं सांस्कृतिक आत्मबोध के सुदृढ़ीकरण का आह्वान किया।
कार्यक्रम में माननीय श्री सुधांशु त्रिवेदी, सांसद (राज्यसभा) ने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की वैचारिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक आत्मसम्मान की अभिव्यक्ति है। उन्होंने हिंदी के माध्यम से भारत की बौद्धिक परंपरा, दर्शन और जीवन-मूल्यों को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए विश्व हिंदी परिषद के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम में डॉ. संगीता बलवंत, सांसद (राज्यसभा) की भी उपस्थिति रही। उन्होंने हिंदी के अंतरराष्ट्रीय विस्तार एवं नई पीढ़ी को भाषा से जोड़ने हेतु परिषद द्वारा किए जा रहे कार्यों को अत्यंत सराहनीय बताया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी की बढ़ती स्वीकार्यता को रेखांकित करते हुए नेपाल के राजदूत श्री शंकर प्रसाद शर्मा, उज्बेकिस्तान के राजदूत श्री सरदार रुस्तमवायेव तथा गुयाना के राजदूत श्री धरम जी की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष वैश्विक गरिमा प्रदान की। इसके अतिरिक्त विशिष्ट अतिथि के रूप में भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री बलदेव पुरुषार्थ की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही।
कार्यक्रम का कुशल संयोजन कार्यक्रम संयोजक डॉ. रश्मि सलूजा द्वारा किया गया। अल्प समय में ध्येय गीत सहित संपूर्ण आयोजन को सुव्यवस्थित, भव्य एवं प्रभावशाली रूप से संपन्न कराने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस अवसर पर आईसीपीआर सदस्य प्रो. सच्चिदानंद मिश्रा, डॉ. पूजा व्यास, केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक डॉ. सुनील कुलकर्णी, हंसराज महाविद्यालय के प्रो. रमा शर्मा, पी.जी.डी.ए.वी. महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आर.के. गुप्ता तथा भारतीय योग संस्थान के अध्यक्ष श्री देशराज सहित अनेक शिक्षाविद्, विद्वान एवं गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
प्रतियोगिता के सफल आयोजन हेतु डॉ सविता जैमिनी , डॉ रेखा शर्मा ,डॉ संगीता त्यागी , डॉ लक्ष्मी , डॉ झबलू राम ,डॉ योजना कालिया एवं डॉ अमिता तिवारी जी को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं साधुवाद प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. प्रीति तोमर द्वारा किया गया तथा संपूर्ण आयोजन का कुशल समन्वय डॉ. हर्ष बाला ने किया। दिल्ली प्रांत के दोनों उपाध्यक्ष दीनदयाल जी एवं प्रतिभा राणा जी सहित सभी सहयोगियों के सामूहिक प्रयासों से कार्यक्रम अत्यंत सफल, गरिमामय एवं सार्थक सिद्ध हुआ।
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