
Bharat Varta Desk: देश के कुछ हाईकोर्टो द्वारा तुरंत अधिकारियों को तलब करने के चलन पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जाहिर की है। देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि कोर्ट का सम्मान अर्जित किया हुआ होना चाहिए ना कि मांगा हुआ।जस्टिस एसके कौल और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने कहा कि इस तरह के आदेशों से कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्ति के बंटवारे के नियम का उल्लंघन होता है। पीठ ने कहा कि कोर्ट का सम्मान किसी अधिकारी का समन करने से नहीं बढ़ता है। इस संबंध में पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसले का उदाहरण देते हुए कहा कि जजों को अपनी सीमा के बारे में पता होनी चाहिए। उनका अचल सम्राट की तरह नहीं होना चाहिए। उनमें विनम्रता और नम्रता होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने उपरोक्त टिप्पणियां डॉ मनोज कुमार शर्मा के सर्विस मैटर में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के फैसले को खारिज करते हुए कही।
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