
पटना, संवाददाता : बिहार व झारखंड का महापर्व छठ पूजा बुधवार को नहाय – खाय के साथ शुरू हो गया है. गुरुवार को खरना के साथ 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो गया।
व्रतियों के साथ-साथ परिवार के सदस्य और दूसरे लोगों ने शाम को खरना का प्रसाद ग्रहण किया ।
शाम को छठवर्ती के घरों में गुड़, अरवा चावल और दूध से मिश्रित खीर या रसिया बनाए गए हैं। रसिया को केले के पत्ते में मिट्टी की ढकनी में रखकर मां षष्ठी को भोग लगाया गया ।
खरना में शाम में मिट्टी के चूल्हे में आम की लकड़ी से गन्ने की रस या गुड़ के साथ अरवा चावल मिला कर खीर बनाया जाता है। खीर के साथ घी चुपड़ी रोटी और कटे हुए फलों का प्रसाद चढ़ाया जाता है। .दूध और गंगा जल से प्रसाद में अर्घ्य देने के बाद व्रति इसे ग्रहण करती है। जाने-माने आचार्य शैलेश तिवारी ने बताया कि दिन भर उपवास रहने के बाद व्रती शाम को प्रसाद तैयार करती हैं और उस प्रसाद से चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं. उसके बाद प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू करती है. 20 नवंबर को पहला अर्घ्य और 21 नवंबर की सुबह उदय गामी सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत करने वाले जल और अन्न ग्रहण करेंगे।
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