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रेशम के धागों को पिरो संताल महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर, मयूराक्षी सिल्क केंद्र ने किया कमाल

पाकुड़ से अशोक कुमार शर्मा

रेशम के धागों को आकार देने में माहिर रूबी कुमारी महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं. कहा जाता है कि हौसला बुलंद हो तो बड़े से बड़े काम किए जा सकते हैं.दिव्यांग रूबी इस कहावत को चरितार्थ कर रही हैं.
झारखंड सरकार ने 27 वर्षीय रूबी के हौसले को सराहते हुए उसका चयन मयूराक्षी सिल्क उत्पादन सह प्रशिक्षण केंद्र, दुमका में धागाकरण और बुनाई के लिए किया. यह संस्था आदिवासी महिलाओं और दुमका को सिल्क सिटी की पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

दिव्यांग रूबी ने जनजातीय कला कलाओं को उकेरा, बनी प्रेरणा स्रोत

इसमें काम करते हुए रूबी ने देखते ही देखते सोहराय, कोहबर, जादुपटिया जैसी हस्तकला को रेशम के वस्त्रों में सधे हाथों से उकेरना शुरू कर दिया. बड़ी संख्या में आदिवासी समाज की महिलाओं को भी उन्होंने इस काम के लिए प्रेरित किया है.अब काफी महिलाएं इन कलाओं को रेशम के घागों में उकेर कर अपने हुनर को पहचान दे रहीं हैं. संथाल परगना रेशम उत्पादन का एक बड़ा केंद्र है.

दुमका को सिल्क सिटी की पहचान

रूबी और मयूराक्षी सिल्क उत्पादन सत्संग केंद्र से जुड़ी महिलाएं दुमका को सिर्फ सिटी के रूप में विकसित करने के अभियान में लगी हैं.संताल परगना में तसर कोकुन का उत्पादन बहुत अधिक होने के बावजूद बिहार के भागलपुर जिला को सिल्क सिटी के नाम से जाना जाता है, जबकि दुमका से ही कच्चा माल लेकर यह ख्याति भागलपुर को मिली है.इसका मुख्य कारण यह रहा कि यहां के लोग केवल तसर कोकुन उत्पादन से जुड़े थे.जबकि, कोकुन उत्पादन के अलावा भी इस क्षेत्र में धागाकरण, वस्त्र बुनाई और डाईंग ,प्रिंटिंग कर और अधिक रोजगार एवं आय की प्राप्ति की जा सकती थी.

सरकार ने तय की रणनीति

इसको देखते हुए राज्य सरकार ने रणनीति तैयार की, ताकि रेशम के क्षेत्र में दुमका को अलग पहचान मिले तथा यहां की गरीब महिलाओं को नियमित आय से जोड़कर स्वावलंबी बनाया जा सके.इसके लिए महिलाओं को प्रशिक्षण के लिए चुना गया.शुरू में लगभग 400 महिलाओं को मयूराक्षी सिल्क उत्पादन के विभिन्न कार्यों का अलग-अलग प्रशिक्षण दिया गया.आज लगभग 500 महिलाओं को विभिन्न माध्यमों से धागाकरण, बुनाई, हस्तकला इत्यादि का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है. पिछले दिनों झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दुमका प्रवास के दौरान मयूराक्षी सिल्क उत्पादन सह प्रशिक्षण केंद्र का निरीक्षण किया. उन्होंने इसे अधिक से अधिक संसाधन देने और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया.

Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

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