पटना डेस्क: बिहार और झारखंड में मकर संक्रांति के पावन पर्व के मौके पर श्रद्धालुओं ने गंगा और नदियों में डुबकी लगाई. उसके बाद मंदिरों में जलाभिषेक किया. फिर तिल दान करने के बाद दही -चूड़ा खाया. यह सिलसिला सुबह से जारी है. बक्सर से लेकर पटना और भागलपुर गंगा घाटों तक सुबह से स्नान करने वालों की भीड़ लगी हुई है. झारखंड में केवल साहिबगंज जिले से होकर गंगा नदी बहती है. हालांकि कोरोना का असर होने के कारण पिछले सालों की अपेक्षा इस बार गंगा तट पर भीड़ कम है. राज्य के प्रमुख मंदिरों में भी पूजा- अर्चना के लिए लोग पहुंच रहे हैं.
दान का खास महत्व -आचार्य शैलेश तिवारी ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, इसलिए इस दिन को मकर संक्रांति कहा जाता है. देवताओं की दिशा में सूर्य के जाने के दिन को शास्त्रों में दान-पुण्य के कार्यों और स्नान के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया है. ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन किए गए दान का 100 गुना ज्यादा फल मिलता है.
क्या करें दान: इस दिन तिल, गुड, अनाज, कंबल और दूसरे वस्त्र तथा खिचड़ी दान का महत्व है. दान स्नान के बाद किया जाना चाहिए.
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