भागलपुर। भागलपुर में प्रति वर्ष कालीपूजा व्यापक पैमाने पर मनायी जाती है और इस अवसर पर नगर के तकरीबन 150 स्थानों पर मां काली की प्रतिमाएं बैठायी जाती हैं। प्रत्येक मुहल्ले में स्थापित होनेवाली प्रतिमाएं अलग-अलग नामों से संबोधित की जाती हैं जिनमें नगर के बूढानाथ ममुहल्ले की मूर्ति का नाम विशिष्ट है। ये बमकाली के नाम से संबोधित की जाती हैं जिनकी पूजा हर वर्ष अनुष्ठानपूर्वक भव्य एवं पारम्परिक रूप से की जाती है। अपने विशाल रूपाकार के कारण ये बमकाली कहलाती हैं जिनके प्रति भक्तों की अपार श्रद्धा है।
श्यामवर्णी कमलजन्मा त्रिनेत्री बमकाली अपने हाथों में खड्ग, चक्र, गदा परिघ, शूल भुशुण्डि और नरमुंड घारण करती हैं जिनके शरीर की कांति नीलमणि की तरह होती है। माता के सभी अंगों में दिव्य आभूषण से विभूषित होती हैं। मां के विग्रह के अगल-बगल में लक्ष्मी और सरस्वती विराजमान होती हैं।
भक्तों की ऐसी आस्था है कि बमकाली माँ कुमुदप्रीता के साथ श्रुतिफलदायक हैं। कहते हैं कि मां की प्रतिमा-विसर्जन के समय यदि उनके वाहन की रस्सी को कोई कुंवारी कन्या कुमारी है तो उसकी शादी में रुकावट नहीं होती है।
भागलपुर की बमकाली यहाँ की सदियों से चली आ रही आस्था व परम्परा की प्रतीक हैं।
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