
नई दिल्ली संवाददाता: राजधानी दिल्ली में चप्पे-चप्पे पर छठ मनाया जाता है। कभी इस पर्व में आस्था रखने और इसे नियम से करने वालों को दिल्ली के लोग अचरज से देखते थे। अब स्थिति ये है कि दिल्ली सरकार छठ की शाम के अर्घ्य के रोज सरकारी छुट्टी की घोषणा करती है।
पूर्वांचल से ताल्लुक रखने वाले पूर्व सांसद और क्रिकेटर कीर्ति आजाद का कहना है कि जब वह 70 के दशक में दिल्ली में पढ़ते थे, तो उनके पिता केंद्र सरकार में मंत्री थे और अशोका रोड स्थित सरकारी घर में वह रहते थे। लेकिन उस जमाने में भी उनके घर में छठ मनाया जाता था और सरकारी घर के कैंपस में ही पानी की हौदी आदि की व्यवस्था होती थी। उसी में खड़े होकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता था।
70 के दशक से दिल्ली में रहने वाले पूर्वांचल के रामप्रीत सिंह बताते हैं कि उन वर्षों में राजधानी में छठ इतना आम नहीं था। कहीं-कहीं लोग इसी तरह से छठ करते थे। लेकिन 80 के दशक की शुरुआत में काफी संख्या में पूर्वांचल के मजदूर दिल्ली आए। उसकी वजह बना 1982 का एशियाड। इसके कारण दिल्ली में काफी विकास का काम हुआ और उसके लिए भारी संख्या में मजदूरों का पूर्वांचल से पलायन हुआ था। तमाम स्टेडियम, सड़कें और फ्लाइओवर का निर्माण हुआ था। जो रोजगार के लिए आए थे, वो एशियाड के बाद यहीं के होकर रह गए।
सेवानिवृत्त अधिकारी अवधेश मिश्रा बताते हैं कि बाहरी दिल्ली, पूर्व दिल्ली और दक्षिण दिल्ली के इलाके में पूर्वांचली बसे। इन्होंने दिल्ली में 80 के दशक से ही छठ मनाना शुरू कर दिया। इन लोगों ने आसपास के यमुना के घाटों से लेकर झील और तालाब के किनारे साफ-सफाई का बीड़ा उठाया और वहीं छठ पर्व का अर्घ्य देने लगे।
बाद में दिल्ली सरकार ने जब देखा कि लाखों लोग छठ पूजा के लिए निकल रहे हैं और घाटों की साफ-सफाई भी खुद कर रहे हैं, तो उसने साफ-सफाई और घाटों की देखरेख का जिम्मा ले लिया। राजधानी के एक हजार से भी ज्यादा घाटों की साफ-सफाई और तमाम इंतजाम दिल्ली सरकार करती है। राजधानी दिल्ली में यमुना घाट ही नहीं, इंडिया गेट के बोट क्लब पर तमाम ब्यूरोक्रेट परिवार सहित छठ पूजा करते नजर आते हैं।
दिल्ली में छठ पर्व की धूम को देखते हुए राज्य सरकार ने 2000 में छठ के मौके पर रिस्ट्रिक्टेड हॉलिडे घोषित किया था। लेकिन दिल्ली के 70 विधानसभा इलाक़ों में करीब 40- 45 ऐसे हैं, जहां पू्र्वांचलियों की संख्या 20 से लेकर 50 फीसदी के आसपास हो चुकी है। कुछ इलाक़ों में तो ज़्यादातर लोग भोजपुरी और मैथिली बोलते नज़र आते हैं।
बदली हुई स्थिति को देखते हुए दिल्ली सरकार ने 2014 में छठ के मौके पर दिल्ली में पहली बार सरकारी छुट्टी की घोषणा की। तब से छठ के मौक़े पर दिल्ली में सरकारी छुट्टी होती है। छठ ने इसी तरह अपना दायरा पूर्वांचल के गांवों से आगे बढ़ाया है। जहां-जहां इन इलाक़ों से जुड़े लोग गए, उन्होंने इस पर्व का प्रसार किया।
सार्वजनिक स्थलों पर कोई भीड़ जुटने की अनुमति नहीं
डीडीएमए ने अपने आदेश में कहा था कि 20 नवंबर को छठ पूजा के लिए सार्वजनिक स्थलों पर कोई भीड़ जुटने की अनुमति नहीं होगी। न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद वाली एक पीठ ने कहा कि पूजा के लिए लोगों को जमा होने की अनुमति देने से संक्रमण का प्रसार हो सकता है। यह कहते हुए पीठ ने याचिका खारिज कर दी। पीठ ने कहा कि मौजूदा समय में इस तरह की याचिका जमीनी सच्चाई से परे है।
Bharat varta Desk -मुख्यमंत्री विजय और अभिनेत्री तृषा पर टिप्पणी का आरोप -उनकी रैली में… Read More
Bharat varta Desk धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी फिलहाल प्रह्लाद… Read More
Bharat varta Desk दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय से चल रहा… Read More
Bharat varta Desk जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र… Read More
Bharat varta Desk NEET पेपर लीक मामले में छात्रों के प्रदर्शन के बीच एनटीए ने… Read More
Bharat Varta Desk दिल्ली में चल रहे NEET पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन… Read More