
सेंट्रल डेस्क: उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आजादी के आंदोलन के दौरान हुई ऐतिहासिक चौरी-चौरा घटना का शताब्दी समारोह मनाया जा रहा है. गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह एक थाने में आग लगाने की घटना नहीं थी, इसके जरिए एक बड़ा संदेश अंग्रेजी हुकूमत को दिया गया था . उन्होंने कहा कि इस घटना को इतिहास में सही स्थान नहीं दिया गया है. प्रधानमंत्री ने इस मौके पर एक विशेष डाक टिकट जारी किया.
उन्होंने कहा कि अंग्रेज सैकड़ों स्वतंत्रता सेनानियों कि जान लेना चाहते थे मगर मालवीय जी, बाबा राघवदास की कोशिशों से सैकड़ों लोगों को बचा लिया गया. प्रधानमंत्री ने कहा की केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने युवा लेखकों को स्वतंत्रता सेनानियों पर किताब लिखने को आमंत्रित किया है .
उन्होंने अपने उद्बोधन में किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी जमीन पर किसी की बुरी नजर नहीं लगेगी.
स्वतंत्रता सेनानियों ने थाने में लगा दी थी आग, उत्तर प्रदेश में पढ़ाई जाएगी घटना
1922 ईस्वी में आजादी की लड़ाई के दौरान चौरा चौरी नामक थाने में स्वतंत्रा सेनानियों ने आग लगा दी थी जिसमें कई पुलिसकर्मी जलकर मर गए थे. इससे दुखी होकर महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया था. गुरुवार को चौरा चोरी घटना का शताब्दी समारोह शुरू किया गया है जो साल भर तक चलेगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चौरा चोरी की घटना को स्कूल के पाठ्यक्रम में पढ़ाने का निर्णय लिया है.
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