
Bharat Varta Desk: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एन वी रमण ने शनिवार को मद्रास हाईकोर्ट के कार्यक्रम में कहा कि न्यायाधीश आंख बंद कर के नियमों को लागू नहीं कर सकते हैं क्योंकि संघर्षों का भी एक मानवीय चेहरा होता है। उन्होंने न्यायाधीशों से कहा कि कोई भी फैसला देने के पहले उनके सामाजिक आर्थिक और सामाजिक प्रभावों का आकलन करना चाहिए। चीफ जस्टिस ने कहा कहा, ‘इन्सटैंट नूडल्स’ के इस दौर में लोगों को तुरंत इंसाफ की उम्मीद होती है, लेकिन उन्हें इस बात का अहसास नहीं है कि अगर हम तत्काल न्याय का प्रयास करते हैं तो वास्तविक न्याय को नुकसान होगा।’ संकट के समय लोगों ने न्यायपालिका की ओर देखा और उनका दृढ़ विश्वास है कि उनके अधिकारों की रक्षा अदालतें करेंगी। उन्होंने कहा कि हमें अपने फैसलों के जरिए जनता के बीच पहुंचना होगा।
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