चिराग पासवान ने कहा- शेर का बेटा हूं, लड़ाई लंबी है, समय-समय पर जवाब देता रहूंगा

नई दिल्ली, भारत वार्ता संवाददाता : लोक जनशक्ति पार्टी के अंदर मचे घमासान के बीच पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद चिराग पासवान ने बुधवार को प्रेस कान्फ्रेंस की और अपना पक्ष रखा. चिराग ने कहा कि कुछ समय से मेरी तबीयत ठीक नही थी. जो हुआ वो मेरे लिये ठीक नही था, दवाई लेकर आया हूं. पार्टी में फूट और बिहार की राजनीति में अलग-थलग पड़ने के बीच चिराग ने कहा कि एक लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी. लड़ाई लंबी है और समय-समय पर सवाल का जवाब वो देंगे. दरअसल, लोजपा के छह सांसदों में पांच सांसदों ने बगावत कर चिराग की जगह पशुपति कुमार पारस को संसदीय दल का नया नेता नियुक्त किया है.

चिराग पासवान ने इसके जवाब में मंगलवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर इन सभी असंतुष्ट नेताओं को पार्टी से निकाल दिया. पशुपति कुमार पारस चिराग पासवान के चाचा और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत राम विलास पासवान के भाई हैं.

चिराग ने कहा कि 8 अक्टूबर के बाद पिताजी के जाने के बाद तुरंत चुनाव में जाना पड़ा. विधानसभा चुनाव में लोजपा को जो जीत मिली है, उसे संख्या से नहीं आंकें, हमें 6 फीसदी वोट मिला, मैंने किसी भी हालत में मुद्दे पर समझौता नहीं किया और जेडीयू के साथ अलग रहेंगे. यह पार्टी का फैसला था. चिराग ने बताया, जब पापा अस्पताल थे, तब भी पार्टी को तोड़ने की बात सामने आई थी. पार्टी में कुछ लोग संघर्ष करना नही चाहते. हम अगर बिहार में नीतीश के साथ लड़ते तो कही ज़्यादा बहुमत मिलता, लेकिन मुझे नतमस्तक होना पड़ता. विधानसभा चुनाव में मुझे चाचा सहित कई नेता का सहयोग नही मिला.

पार्टी में फूट और बिहार की राजनीति में अलग-थलग पड़ने के बीच चिराग ने कहा कि एक लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी. मैं इस मसले को आगे नही बढ़ाना चाहता था लेकिन अनुशासन के लिए कार्रवाई करना पड़ी.चिराग ने कहा, मुझे टाइफाइड हुआ, 40 दिन लगा ठीक होने पर. उस दौरान ये साजिश रची गई. मैंने बात करना चाही और होली के दिन भी मेरे साथ कोई भी नही था. हम उनसे बात करना चाहते थे, क्योंकि मेरी कोशिश पार्टी और परिवार को बचाने की थी. लेकिन कल जब लगा, अब कुछ नहीं हो सकता तो फिर मैंने उनको निकाला. मुझे कहते तो मैं उनको लोकसभा नेता बना देता, लेकिन जिस तरीके से उनको नेता चुना गया वो प्रक्रिया गलत थी. यह निर्णय संसदीय बोर्ड के पास है. जेडीयू ने समाज को बांटने की कोशिश की. दलित और महादलित के नाम पर बांटने की कोशिश की, लेकिन मेरे साथ और पार्टी के साथ बिहार की जनता खड़ी है.

Ravindra Nath Tiwari

तीन दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय। 17 साल हिंदुस्तान अखबार के साथ पत्रकारिता के बाद अब 'भारत वार्ता' में प्रधान संपादक।

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