
News N Live Desk: बाहुबली शहाबुद्दीन ने चंदा बाबू के दो बेटों को तेजाब से जलाकर मार डाला था। दोनों की लाशें बोरे में भरकर फेंकवा दिया गया था। वजह रंगदारी थी। चंदा बाबू ने रंगदारी के दो लाख रुपये नहीं दिए थे। एक तरफ सीवान का शहाबुद्दीन जैसा बाहुबली, दूसरी तरफ चंदा बाबू जैसा अभागा, बेबस, लाचार पिता। मुकाबला बिल्कुल बराबरी का नहीं था। लेकिन, चंदा बाबू ने हार नहीं मानी और बाहुबली के जुल्मों के खिलाफ लड़ते रहे। आखिरकार, सीवान के डॉन को जेल में डलवाकर और सजा दिलवाकर ही माने। वे साहस की मिसाल बने। वे देश के उन तमाम पीड़ितों के लिए प्रेरणास्त्रोत बने, जो पॉवरफुल लोगों के अत्याचार के खिलाफ लड़ रहे हैं।
डर और कुछ भी अनहोनी होने की आशंका के बीच अत्याचार के विरुद्ध जंग लड़ने वाले चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू का बुधवार की शाम सिवान के गौशाला स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे।
बता दें कि चंदा बाबू के दो पुत्रों को तेजाब से नहलाकर हत्या करने का आरोप राजद के पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन पर लगा था। इस मामले में शहाबुद्दीन को निचली अदालत से सजा भी हुई। यह मामला काफी चर्चित हुआ। इसके बाद उनके तीसरे पुत्र राजीव रोशन जो चंदा बाबू के साथ इस कांड का मुख्य गवाह था उसकी हत्या भी अपराधियों ने शहर के डीएवी मोड़ पर गोली मार कर दी थी। इसके बाद चंदा बाबू की पत्नी का निधन पिछले वर्ष हो गया। पत्नी के निधन के बाद वे अपने दिव्यांग चौथे पुत्र के साथ अकेले शहर के गौशाला रोड स्थित अपने आवास में रहते थे।
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