पॉलिटिक्स

गोविंदाचार्य ने कहा- तीन कृषि कानूनों से किसानों में व्याप्त आशंकाओं को दूर करने का उपाय है ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य गारण्टी कानून’

News N Live Desk: भारतीय जनता पार्टी के सिद्धांतकार एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रह चुके के एन गोविंदाचार्य ने कहा है कि कृषि उपज बाजार समिति कानून (APMC Act) के अनुसार कृषि उपज बाजार समिति की मंडी में उपजों की बिक्री पर 6% मंडी टैक्स लगता है। सरकार ने जो नया कानून लाया है, उसके अनुसार कृषि उपज बाजार समिति कानून के अंतर्गत गठित मंडियों के अलावा अन्य मंडियों में वह 6% टैक्स नहीं लगेगा। अर्थात सरकारी मंडी और निजी मंडी में 6% लाभ का अंतर आ गया।

गोविंदाचार्य ने कहा कि किसानों को आशंका है कि इस नए कानून के अनुसार निजी मंडियों में 6% टैक्स नहीं लगना है, इसलिए 6% अतिरिक्त लाभ के लोभ में किसान निजी मंडियों में अपनी कृषि उपज बेचने जाने लगेंगे। निजी व्यापारी प्रारम्भ में न्यूनतम समर्थन मूल्य या उससे कुछ अधिक मूल्य पर कृषि उपज खरीदना शुरू कर देंगे। इन दो कारणों से धीरे धीरे सरकारी कृषि उपज बाजार समिति की मंडियों वीरान हो जाएंगी। जब वहां बहुत किसान जाना ही बंद कर देंगे तो उन मंडियों के आढ़तियों का व्यापार बंद हो जाएगा। वे अन्य व्यापार में लग जाएंगे। इस प्रकार सरकारी मंडियां बंद हो जाएंगी। 2-3 वर्ष में उन मंडियों के बंद हो जाने पर निजी व्यापारी मनमाना दाम तय करने लग जाएंगे। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर बेचने के लिए मजबूर करने लग जाएंगें। चूंकि तब तक सरकारी मंडियां बंद हो चुकी होंगी, इसलिए किसानों के पास दूसरा कोई रास्ता ही नहीं बचेगा। किसानों का भीषण शोषण प्रारम्भ जो जाएगा। किसानी और भी घाटे का सौदा हो जाएगा।

आगे गोविंदाचार्य ने कहा कि इन्हीं आशंकाओं के कारण किसान नए कृषि कानूनों का विरोध करने सड़कों पर उतरे हैं। किसानों की इन आशंकाओं को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारण्टी देने वाला कानून ही दूर कर सकता है। जब कानूनी रूप से न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दाम पर खरीदना अपराध हो जाएगा, सरकारी मंडी हो निजी मंडी, व्यापारियों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ही खरीदना पड़ेगा। अगर उससे कम दाम पर खरीदेंगे तो कानून के अनुसार दंड मिलेगा। अपनी मांगों के समर्थन में सड़कों पर उतरे किसानों की आशंकाओं को दूर करने और उन्हें आश्वस्त करने के लिए सरकार शीघ्र ही न्यूनतम समर्थन मूल्य का गारण्टी कानून बनाएगी, ऐसी आशा है।

Dr Rishikesh

Editor - Bharat Varta (National Monthly Magazine & Web Media Network)

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