
Bharat Vartar Desk: महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी की ओर से जानी-मानी गांधीवादी और नारी लेखिका डॉक्टर सुजाता चौधरी को सम्मानित किया गया है। उन्हें रविवार को आयोजित एक समारोह में 51 हजार का पुरस्कार दिया गया। इस मौके पर आरएसएस के विचारक राम माधव, कुलपति समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे। दरअसल सुजाता को यह सम्मान उनकी कालजई रचना “सौ साल पहले: चंपारण का गाँधी” के लिए दिया गया है। यह एक उपन्यास है जो वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित है। पुरस्कार पाने के बाद सुजाता चौधरी ने कहा कि उनका मन बहुत भावुक हो रहा है। कुलपति की अध्यक्षता में 7 विभागाध्यक्षों की कमेटी ने पुरस्कार के लिए इस किताब का चयन किया। शिक्षकों और छात्रों को यह किताब बहुत भायी है। उन्होंने कहा कि पुरस्कार में राशि महत्वपूर्ण नहीं होती बल्कि पुरस्कार की पृष्ठभूमि में पाठकों की जो व्यापक स्वीकृति होती है वही लेखक की संतुष्टि और आनंद का कारण बनती है।
किताब पर पंजाब में पीएचडी
सुजाता चौधरी के इस उपन्यास “सौ साल पहले :चंपारण का गांधी”पर पंजाब में शोध हुआ है। संदीप कौर नामक छात्रा ने पंजाब विश्वविद्यालय, पटियाला से इस पर पीएचडी की है। पिछले दिनों विश्वविद्यालय से उन्हें डिग्री मिली।
पुरस्कार की राशि का दान, सेवा के लिए मशहूर
लेखिका ने उपन्यास के लिए मिली पुरस्कार की 51 हजार रुपए की राशि गांधी आश्रम, सोभानपुर, बांका में भवन निर्माण हेतु दान कर दिया है। सुजाता एक नामचीन लेखिका होने के साथ-साथ समाज सेवा के लिए भी मशहूर हैं। वह बिहार का रेशमी शहर कहे जाने वाले भागलपुर की रहने वाली हैं। उन्होंने 2 दर्जन से अधिक किताबें लिखी हैं। ज्यादातर किताबें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और नारी शक्ति पर केंद्रित हैं। इसके पहले देश-विदेश के कई पुरस्कार उन्हें मिल चुके हैं। सुजाता महिला और अनाथ बच्चों के विकास के लिए कई काम कर रही हैं। भागलपुर शहर, उससे कुछ दूर रन्नुचक गांव, समस्तीपुर के अलावे वृंदावन में भी उनके सेवा कार्य चल रहे हैं। रन्नुचक में गरीब बच्चों के लिए उनका स्कूल भी चलता है। उनके पति डॉ अमरेंद्र चौधरी भागलपुर शहर के नामचीन डॉक्टर हैं। सुजाता के भाई डॉक्टर ध्रुव कुमार भागलपुर और दरभंगा विश्वविद्यालय में प्रति कुलपति रह चुके हैं। अभी ए.एन.एस. कॉलेज, बाढ़, पटना के प्राचार्य हैं। उनके एक भाई स्वामी प्रणय अपनी मां के साथ वृंदावन स्थित आश्रम में रहते हैं। सुजाता के स्वर्गीय पिता मगध विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति रह चुके हैं। अत्यंत धार्मिक और संस्कारी पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाली सुजाता चौधरी का व्यक्तित्व और कृतित्व समाज को प्रेरणा देने वाला है।
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