
पटना: कृषि कानून के विरोध में आंदोलन की लपट दिल्ली से अब बिहार की ओर भी पहुंच गई है. शनिवार को जहां कई जिलों में माले ने धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम का आयोजन किया वही राजद की ओर से गांधी मैदान के बाहर धरना दिया गया. धरना का आयोजन गांधी मैदान के भीतर गांधीजी की मूर्ति के सामने किया जाना था मगर सुबह जिला प्रशासन ने गांधी मैदान के सारे गेटो को बंद करवा दिया. मैदान के भीतर राजद को धरने की अनुमति नहीं दी. इसके बाद बड़ी संख्या में जुटे राजद के नेता और कार्यकर्ता गेट नंबर चार के बाहर पर बैठ गए. वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार सरकार के खिलाफ लगातार नारे लगा रहे थे. धरना स्थल पर पहुंचे प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने गेट के सामने खड़ा होकर कार्यकर्ताओं को शांत करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि हम अपनी बातों को शांतिपूर्ण ढंग से रखना चाहते हैं. उन्होंने कृषि कानून के खिलाफ और किसानों की दयनीय हालत व पलायन की समस्या पर चर्चा की. उन्होंने केंद्र सरकार राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा. धरना स्थल पर पहुंचे कांग्रेस विधायक दल के नेता अजीत शर्मा और दूसरे नेताओं ने भी केंद्र व राज्य सरकार को कृषि बिल के सवाल पर आड़े हाथों लिया. जब भागवत बैठक कर सकते तो हम धरना क्यों नहीं: शिवानंद राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि गांधी मैदान के भीतर मूर्ति के सामने धरना पर रोक लगाया जाना पूरी तरह गलत है. जब मोहन भागवत आज पटना में बैठक कर सकते हैं तो हम धरना क्यों नहीं? उन्होंने कहा कि गांधी मैदान के सारे दरवाजे में ताला जड़कर गांधी को कैद कर लिया है प्रशासन ने. महागठबंधन ने लिया संकल्प: इस मौके पर जुटे महागठबंधन दल के नेता और कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि जब तक केंद्र सरकार तीनों काले कानूनों को वापस नहीं ले लेती तब तक महागठबंधन दल किसानों के संघर्ष के साथ खड़े रहेंगे. यह संकल्प प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने दिलवाया.
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