
Bharat varta desk:
यूपीएससी में देश में देश में टॉप करने वाला शुभम जब बिहार के कटिहार जिला स्थित अपने गांव पहुंचा तो उसका जोरदार स्वागत किया गया। स्वागत समारोह में उसने अपने भाषण के शुरू में कहा- हम अपन मातृभूमि के प्रणाम करय छियै, हमर नाम शुभम कुमार छियै। हमरा ठेठी नय आय छय। उसके बाद उन्होंने कहा कि एक महीना पहले मैंने अपनी मां से कहा कि आपने हमको सब कुछ दिया मगर अपनी भाषा ठेठी नहीं सिखाई। उन्होंने कहा कि ठेठी मैथिली की एक भाषा है। शुभम ने कहा कि ‘आप अपने बच्चों को सारा लैंग्वेज सिखाइये। उन्हें हिंदी भी सिखाइये, इंग्लिश भी सिखाइये। लेकिन अपनी भाषा जरूर सिखाइए। आप लोगों को लगता होगा कि मैं ऐसे ही बोल रहा हूं। लेकिन जब मैं अपनी ट्रेनिंग एकेडमी में गया तो वहां पर सभी यूपीएससी क्रैक किए हुए लोग बैठे थे। सब रैंकर्स थे टॉपर थे।’
शुभम कुमार ने बताया कि जब मैं वहां पहुंचा तो उन्होंने मुझसे पूछा कि तुम हिंदी क्यों बोलते तो तुम्हारी मातृभाषा क्या है। मैंने कहा कि अपनी मातृभाषा मैंने कभी सीखी ही नहीं। वहां बैठे लोगों के लिए हिंदी दूसरी भाषा थी उसके अलावा उनकी कोई न कोई मातृभाषा थी, जिस पर वे गर्व करते हैं। मेरा यह कहना है कि हमें अपनी संस्कृति पर गर्व होना चाहिए। जहां भी मैं गया तो लोगों ने शुरुआत में कहा कि ये तो बिहारी है। लेकिन धीरे-धीरे उन्हें यकीन हो गया कि एक बिहारी क्या कर सकता है? जब शुभम मंच से भाषण दे रहे थे तो उनके बगल में उनकी मां भी खड़ी थीं जो भाव विभोर हो रही थी।
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